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Tuesday, June 28, 2016

**बच्चों का बिस्तर पर पेशाब करना**

बच्चा अगर सोने से पहले दूध पीता हैं तो उसे एक घंटे पहले पिलायें
और सोने से पहले पेशाब जरुर कराएँ
बच्चों का बिस्तर पर पेशाब करना -
बच्चों का थोड़ा बड़े होने पर पेशाब करना एक
आम समस्या है | इस समस्या के बहुत से कारण हो
सकते हैं | कई अनुभवियों के अनुसार स्नायु विकृति
के कारण या पेट में कीड़े होने पर भी बच्चे सोते हुए
बिस्तर पर पेशाब कर देते हैं | पेशाब की नली में
रोग के कारण भी बच्चा सोते हुए पेशाब कर देता
है | कई बार कुछ गरिष्ठ भोजन व ठंडे पदार्थों के
अधिक सेवन से भी यह समस्या उत्पन्न हो जाती
है | इस समस्या को समाप्त करने के लिए कोई भी
औषधि देने से पूर्व माता-पिता को बच्चे के
भोजन की कुछ आदतें सुधारनी जरूरी हैं | बच्चों
को सोने से एक घंटा पहले भोजन करा देना
चाहिए और सोने के बाद उसे जगाकर कुछ भी
खाने-पीने को नहीं देना चाहिए | बच्चे को
बिस्तर पर जाने से पहले एक बार पेशाब अवश्य
करा देना चाहिए |
कुछ औषधियों द्वारा भी इस समस्या का
समाधान सम्भव है -
१- पचास ग्राम अजवायन का चूर्ण कर लें |
प्रतिदिन एक ग्राम चूर्ण को रात को सोने से
पूर्व बच्चे को खिलाएं | ऐसा कुछ दिनों तक
नियमित रूप से करने से यह रोग ठीक हो जाता है
|
२- दो मुनक्कों के बीज निकालकर उसमें १-१
काली मिर्च डालकर बच्चों को रात को सोने
से पहले खिला दें | ऐसा दो हफ़्तों तक नियमित
रूप से सेवन करने से यह बीमारी दूर हो जाती है |
३- प्रतिदिन दो अखरोट और बीस किशमिश
बच्चों को खिलाने से बिस्तर में पेशाब करने की
समस्या दूर हो जाती है |
४- रात को सोते समय बच्चों को शहद खिलाने
से यह रोग समाप्त हो जाता है |
५- जामुन की गुठलियों को छाया में सुखाकर
बारीक पीस लें | इस चूर्ण का २-२ ग्राम दिन में
दो बार पानी के साथ सेवन करने से बच्चे बिस्तर
पर पेशाब करना बंद कर देते हैं |
६- २५० मिली दूध में एक छुहारा डालकर उबाल लें
| इसे दो घंटे तक रखा रहने दें | इसके बाद इसमें से
छुहारा निकाल कर बच्चे को खिला दें और इस
दूध को हल्का गर्म करके ऊपर से पिला दें | ऐसा
प्रतिदिन करने से कुछ ही दिनों में बच्चों का
बिस्तर पर पेशाब करना बंद हो जाता है |

Monday, June 27, 2016

**भोजन द्वारा स्वास्थ्य**

केला: ब्लडप्रेशर नियंत्रित करता है,हड्डियों को मजबूत बनाता है,हृदय की सुरक्छा करता है,अतिसार में लाभदायक है, खांसी में हितकारी है। जामुन: केन्सर की रोक थाम , हृदय की सुरक्क्छा,कब्ज मिटाता है,स्मरण शक्ति बढाता है,रक्त शर्करा नियंत्रित करता है।डायबीटीज में अति लाभदायक। सेवफ़ल: हृदय की सुरक्छा करता है,दस्त रोकता है,कब्ज में फ़ायदेमंद है,फ़ेफ़डे की शक्ति बढाता है. चुकंदर: वजन घटाता है,ब्लडप्रेशर नियंत्रित करता है,अस्थिक्छरण रोकता है,केंसर के विरुद्ध लडता है,हृदय की सुरक्छा करता है। पत्ता गोभी: बवासीर में हितकारी है,हृदय रोगों में लाभदायक है,कब्ज मिटाता है, वजन घटाने में सहायक है।, केंसर में फ़ायदेमंद है। गाजर: नेत्र ज्योति वर्धक है, केंसर प्रतिरोधक है, वजन घटाने मं सहायक है, कब्ज मिटाता है, हृदय की सुरक्छा करता है। फ़ूल गोभी हड्डियों को मजबूत बनाता है, स्तन केंसर से बचाव करता है, प्रोस्टेट ग्रंथि के केंसर में भी उपयोगी है, चोंट,खरोंच ठीक करता है। लहसुन: कोलेस्टरोल घटाती है, रक्त चाप घटाती है, कीटाणुनाशक है,केंसर से लडती है। शहद: घाव भरने में उपयोगे है, पाचन क्रिया सुधारती है, एलर्जी रोगों में उपकारी है, अल्सर से मुक्तिकारक है, तत्काल स्फ़ूर्ती देती है। नींबू: त्वचा को मुलायम बनाता है,केंसर अवरोधक है, हृदय की सुरक्छा करता है,,ब्लड प्रेशर नियंत्रित करता है, स्कर्वी रोग नाशक है। अंगूर: रक्त प्रवाह वर्धक है, हृदय की सुरक्छा करता है, केंसर से लडता है, गुर्दे की पथरी नष्ट करता है, नेत्र ज्योति वर्धक है। आम: केंसर से बचाव करता है,थायराईड रोग में हितकारी है, पाचन शक्ति बढाता है, याददाश्त की कमजोरी में हितकर है। प्याज: फ़ंगस रोधी गुण हैं, हार्ट अटेक की रिस्क को कम करता है। जीवाणु नाशक है,केंसर विरोधी है। खराब कोलेस्टरोल को घटाता है। अलसी के बीज: मानसिक शक्ति वर्धक है, रोग प्रतिकारक शक्ति को ताकत देता है, डायबीटीज में उपकारी है, हृदय की सुरक्छा करता है, डायजेशन को ठीक करता है। संतरा: हृदय की सुरक्छा करता है, रोग प्रतिकारक शक्ति उन्नत करता है,, श्वसन पथ के विकारों में लाभकारी है, केंसर में हितकारी है। ------------------------------------------------------- टमाटर: कोलेस्टरोल कम करता है, प्रोस्टेट ग्रंथि के स्वास्थ्य के लिये उपकारी है,केंसर से बचाव करता है, हृदय की सुरक्छा. ------------------------------------------------- पानी: गुर्दे की पथरी नाशक है, वजन घटाने में सहायक है, केसर के विरुद्ध लडता है, त्वचा के चमक बढाता है। अखरोट: मूड उन्नत करन में सहायक है, मेमोरी पावर बढाता है,केंसर से लड सकता है, हृदय रोगों से बचाव करता है,कोलेस्टरोल घटाने मं मददगार है। तरबूज: स्ट्रोक रोकने में उपयोगी है, प्रोस्टेट के स्वास्थ्य के लिये हितकारी है, रक्तचाप घटाता है, वजन कम करने में सहायक है। अंकुरित गेहूं: बडी आंत की केंसर से लडता है, कब्ज प्रतिकारक है, स्ट्रोक से रक्छा करता है, कोलेस्टरोल कम करता है, पाचन सुधारता है। चावल: किडनी स्टोन में हितकारी है, डायबीटीज में लाभदायक है,स्ट्रोक से बचाव करता है, केंसर से लडता है, हृदय की सुरक्छा करता है। आलू बुखारा: हृदय रोगों से बचाव करता है, बुढापा जल्द आने से रोकता है, याददाश्त बढाता है, कोलेस्टरोल घटाता है, कब्ज प्रतिकारक है। पाएनेपल: अतिसार(दस्त) रोकता है, वार्ट्स(मस्से) ठीक करता है, सर्दी,ठंड से बचाव करता है, अस्थि क्छरण रोकता है। पाचन सुधारता है। जौ,जई: कोलेस्टरोल घटाता है,केंसर से लडता है, डायबीटीज में उपकारी है,,कब्ज प्रतिकारक् है ,त्वचा पर शाईनिंग लाता है। अंजीर: रक्त चाप नियंत्रित करता है, स्ट्रोक्स से बचाता है, कोलेस्टरोल कम करता है, केंसर से लडता है,वजन घटाने में सहायक है। शकरकंद: आंखों की रोशनी बढाता है,मूड उन्नत करता है, हड्डिया बलवान ब चमत्कारिक स्वास्थ्य योग चमत्कारिक चूर्ण250 ग्राम मैथीदाना100 ग्राम अजवाईन50 ग्राम काली जीरीउपरोक्त तीनो चीजों को साफ-सुथरा करके हल्का-हल्का सेंकना(ज्यादा सेंकना नहीं) तीनों को अच्छी तरह मिक्स करके मिक्सर में पावडर बनाकर अच्छा पैक डिब्बा-शीशी या बरनी में भर लेवें ।रात्रि को सोते समय चम्मच पावडर एक गिलास पूरा कुन-कुना पानी के साथ लेना है। गरम पानी के साथ ही लेना अत्यंत आवश्यक है लेने के बाद कुछ भी खाना पीना नहीं है। यह चूर्ण सभी उम्र के व्यक्ति ले सकतें है।चूर्ण रोज-रोज लेने से शरीर के कोने-कोने में जमा पडी गंदगी(कचरा) मल और पेशाब द्वारा बाहर निकल जाएगी । पूरा फायदा तो 80-90 दिन में महसूस करेगें, जब फालतू चरबी गल जाएगी, नया शुद्ध खून का संचार होगा । चमड़ी की झुर्रियाॅ अपने आप दूर हो जाएगी। शरीर तेजस्वी, स्फूर्तिवाला व सुंदर बन जायेगा ।‘‘फायदे’’1. गठिया दूर होगा और गठिया जैसा जिद्दी रोग दूर हो जायेगा ।2. हड्डियाँ मजबूत होगी ।3. आख का तेज बढ़ेगा ।4. बालों का विकास होगा।5. पुरानी कब्जियत से हमेशा के लिए मुक्ति।6. शरीर में खुन दौड़ने लगेगा ।7. कफ से मुक्ति ।8. हृदय की कार्य क्षमता बढ़ेगी ।9. थकान नहीं रहेगी, घोड़े की तहर दौड़ते जाएगें।10. स्मरण शक्ति बढ़ेगी ।11. स्त्री का शारीर शादी के बाद बेडोल की जगह सुंदर बनेगा ।12. कान का बहरापन दूर होगा ।13. भूतकाल में जो एलाॅपेथी दवा का साईड इफेक्ट से मुक्त होगें।14. खून में सफाई और शुद्धता बढ़ेगी ।15. शरीर की सभी खून की नलिकाए शुद्ध हो जाएगी ।16. दांत मजबूत बनेगा, इनेमल जींवत रहेगा ।17. नपुसंकता दूर होगी।18. डायबिटिज काबू में रहेगी, डायबिटीज की जो दवा लेते है वह चालू रखना है। इस चूर्ण का असर दो माह लेने के बाद से दिखने लगेगा । जिंदगी निरोग, आनंददायक, चिंता रहित स्फूर्ति दायक और आयुष्ययवर्धक बनेगी । जीवन जीने योग्य बनेगा

Saturday, June 25, 2016

आवश्यक जानकारी बिना पढ़े मत छोड़ना सभी को अपनाना भी सेहत के लिए फायदेमंद हल्दी पानी सुबह क्यों ले ?

आमतौर पर देखा गया है कि लोग उठते ही गर्म पानी या फिर निम्बू पानी का सेवन करते है जिससे कि उनका पेट साफ़ हो और खुल कर शरीर की गंदगी बाहर निकल जाए वैसे तो ये है ही फायदेमंद ,मगर यदि इसमें थोड़ी सी हल्दी यदि मिक्स कर दी जाए तो इसके गुणों में भारी इजाफा हो जाता है तो फिर देर किस बात की कल से ही शुरू करे ये हल्दी वाला पानी तो आइये जानते है हम इसे कैसे बनायेगे - एक गिलास पानी में आप आधा नीबू निचोड़ कर उसमे चौथाई चम्मच हल्दी मिला कर चला कर मिक्स कर ले फिर उसमे आधा या फिर पूरा एक चम्मच अपनी आवश्यकता अनुसार शहद मिला ले - और इसका सेवन करे फायदे --- 1- आपको पता है कि हल्दी एक ताकतवर एंटी-आक्सीडेंट भी है एंटी-कैंसर के गुणों से भरपूर है ये-इसमें करक्यूमिन होने के कारण कैंसर पैदा करने वाली कोशिकाओं से भी लडती है - 2- क्या आप जानते है कि हल्दी का सेवन रोज करने से पित्त जादा बनता है जिससे हमारे खाने को पचाने की क्षमता विकसित हो जाती है लेकिन अधिक मात्रा किसी भी चीज की नुकसानदायक होती है - 3- शरीर में सूजन कितनी भी क्यों न हो हल्दी सूजन को कम करने में सहायक है इसमें करक्यूमिन नामक एक रसायन पाया जाता है जो दवा के रूप में काम करता है इसीलिए आपने देखा होगा किसी को भी चोट लग जाती है तो हमारे बुजुर्ग हल्दी दूध में डालकर पिलाते थे- 4- हल्दी दिमाग के लिए भी फायदेमंद होती है जिनको भूलने जैसी बिमारी है वो इसका सेवन करके अपनी इस बिमारी को काफी हद तक कम कर सकते है- 5- जिन लोगो की खून की धमनियों में ब्लोकेज की शिकायत है उनको तो अवस्य ही हल्दी वाला पानी सेवन करना लाभदायक है क्युकि हल्दी खून को जमने से रोकता है अदरक भी खून को पतला रखती है और ब्लाकेज से बचाती है - 6- जो लोग नियमित हल्दी वाला पानी उपयोग करते है उनके चेहरे व शरीर पर रैडिकल्स कम होते है इससे आपके शरीर पर उम्र का असर कम दीखता है - 7- एक रिसर्च के अनुसार हल्दी के सेवन से ग्लूकोज का लेबल कम हो सकता है अर्थात डायबिटीज (मधुमेह) का खतरा टाला जा सकता है - 8- अर्थराइटिस होने पर हल्दी वाला पानी -इसमें करक्यूमिन होने के कारण जोड़ो के दर्द और सूजन को दूर करके आपको काफी हद तक राहत पहुंचाता है - 9- आपके लीवर के खराब हो चुके सेल्स को ठीक करने में हल्दी आपकी बहुत मदद करता है तथा पित्ताशय की प्रक्रिया को भी चुस्त और दुरुस्त रखता है - 10- यदि किसी कारण से शरीर के बाहरी या अंदरूनी हिस्से में चोट लग जाए-तो हल्दी वाला दूध उसे जल्द से जल्द ठीक करने में बेहद लाभदायक है क्योंकि यह अपने एंटी बैक्टीरियल और एंटीसेप्टिक गुणों के कारण बैक्टीरिया को पनपने नहीं देता है

Thursday, June 23, 2016

पानी

1- सुबह उठ कर कैसा पानी पीना चाहिए उत्तर : हल्का गर्म 2--पानी पीने का क्या तरीका होता है उत्तर : सिप सिप करके व नीचे बैठ कर 3 -खाना कितनी बार चबाना चाहिए उत्तर : 32 बार 4-- पेट भर कर खाना कब खाना चाहिए उत्तर : सुबह 5--सुबह का खाना कब तक खा लेना चाहिए उत्तर : सूरज निकलने के ढाई घण्टे तक 6--सुबह खाने के साथ क्या पीना चाहिए उत्तर : जूस 7 -दोपहर को खाने के साथ क्या पीना चाहिए उत्तर : लस्सी/छाछ 8 -रात को खाने के साथ क्या पीना चाहिए उत्तर : दूध 9 -खट्टे फल किस समय नही खाने चाहिए उत्तर : रात को 10 -लस्सी खाने के साथ कब पीनि चाहिए उत्तर : दोपहर को 11 -खाने के साथ जूस कब लिया जा सकता है। उत्तर : सुबह 12 -खाने के साथ दूध कब ले सकते है उत्तर : रात को 13 -आईसक्रीम कब कहानी चाहिए उत्तर : कभी नही 14- फ्रीज़ से निकाली हुई चीज कितनी देर बाद कहानी चाहिए उत्तर : 1 घण्टे बाद 15-क्या कोल्ड ड्रिंक पीना चाहिए उत्तर : नही 16 -बना हुआ खाना कितनी देर बाद तक खा लेना चाहिए उत्तर : 40 मिनट 17--रात को कितना खाना खाना चाहिए उत्तर : न के बराबर 18 -रात का खाना किस समय कर लेना चाहिए उत्तर ;सूरज छिपने से पहले 19 -पानी खाना खाने से कितने समय पहले पी सकते हैं उत्तर : 48 मिनट 20-क्या रात को लस्सी पी सकते हैं उत्तर : नही 21 -सुबह खाने के बाद क्या करना चाहिए उत्तर : काम 22 -दोपहर को खाना खाने के बाद क्या करना चाहिए उत्तर : आराम 23 -रात को खाना खाने के बाद क्या करना चाहिए उत्तर : 500 कदम चलना चाहिए 24 -खाना खाने के बाद हमेशा क्या करना चाहिए उत्तर : वज्र आसन 25 -खाना खाने के बाद वज्रासन कितनी देर करना चाहिए उत्तर : 5-10मिनट 26 -सुबह उठ कर आखों मे क्या डालना चाहिए उत्तर :मुंह की लार 27 -रात को किस समय तक सो जाना चाहिए उत्तर : 9-10बजे तक 28- तीन जहर के नाम बताओ उत्तर : चीनी मैदा सफेद नमक 29 -दोपहर को सब्जी मे क्या डाल कर खाना चाहिए उत्तर : अजवायन 30 -क्या रात को सलाद खानी चाहिए उत्तर : नहीं 31 -खाना हमेशा कैसे खाना चाहिए उत्तर : नीचे बैठकर व खूब चबाकर 32 -क्या विदेशी समान खरीदना चाहिए उत्तर : कभी नही 33 -चाय कब पीनी चाहिए उत्तर : कभी नहीं 33- दूध मे क्या डाल कर पीना चाहिए उत्तर : हल्दी 34--दूध में हल्दी डालकर क्यों पीनी चाहिए। उत्तर : कैंसर ना हो इसलिए 35 -कौन सी चिकित्सा पद्धति ठीक है उत्तर : आयुर्वेद 36 -सोने के बर्तन का पानी कब पीना चाहिए उत्तर : अक्टूबर से मार्च (सर्दियों मे) 37--ताम्बे के बर्तन का पानी कब पीना चाहिए उत्तर : जून से सितम्बर(वर्षा ऋतु) 38 -मिट्टी के घड़े का पानी कब पीना चाहिए उत्तर : मार्च से जून (गर्मियों में) 39 -सुबह का पानी कितना पीना चाहिए उत्तर : कम से कम 2-3गिलास 40 -सुबह कब उठना चाहिए उत्तर : सूरज निकलने से डेढ़ घण्टा पहले। Email This

Wednesday, June 22, 2016

**सुंदर शिशु के लिए घरेलू उपाय**

शिशु का स्वास्थ्य और रूप-रंग काफी कुछ मां के खानपान और व्यवहार पर निर्भर करता है। आप जैसा आहार खायेंगे और जैसा बर्ताव करेंगे आपके शिशु पर उसका गहरा असर पड़ेगा। हर औरत चाहती है कि उसका शिशु स्वस्थ्य व सुंदर हो। इसके लिए वह हर नुस्खे अपनाने को तैयार रहती है। स्वस्थ्य व सुंदर शिशु पाने के लिए खान-पान पर विशेष ध्यान देने की जरुरत होती है। गर्भावस्था के दौरान आपकेखाने में ज्यादा से ज्यादा पोषण वाली चीजें होनी चाहिए इससे आपका बच्चा स्वेस्थै होने के साथ सुंदर भी होगा। गर्भावस्था में आपको हरी सब्जियां, दूध, फल आदि का सेवन करना चाहिए इससे आपको व बच्चे को विटामिन मिनरल व अन्य पोषक तत्व मिलते हैं। संतरे का सेवन ___________________________________________________ गर्भावस्था के दौरान नियमित रुप से रसीले संतरों का सेवन करना चाहिए। इस से नवजात शिशु गोरा व सुन्दर होता है। संतरे में विटामिन सी पाया जाता है जो रंग निखारता है। कच्चा नारियल ___________________________________________________ गर्भवती महिलाओं को कच्चा नारियल खाना चाहिए क्योंकि नारियल में बहुत ज्यादा पोटैशियम होता है जो कि बच्चे की त्वचा और बाल के लिए अच्छा होता है। नारियल पानी भी गर्भावस्था में फायदेमंद होता है। नारियल खाने में भी स्वादिष्ट, मुलायम और सुपाच्य भी होता है, उसका सफेद रंग त्वचा के मिलेनिन में मिलकर रक्त संचार में मदद करता है जिसके चलते बॉडी में त्वचा का रंग साफ होता है। नारियल में मिश्री मिलाकर खाएं कच्चे नारियल के छोटे-छोटे टुकड़ों में मिश्री मिलाकर चबा- चबा कर खाने से भी बच्चा सुन्दर होगा और उसकी त्वचा चमकदार होगी। नारियल पानी और जरूरी पोषक तत्वों की खान होता है। नारियल में मौजूद तत्व गर्भस्थ शिशु का रूप निखारने में मदद करते हैं। हरी सब्जियां खाएं ____________________________________________________ गर्भवती महिलाओं को ज्यादा से ज्यादा हरी सब्जियां खानी चाहिए। हरी सब्जियां आयरन का अच्छा स्रोत होती हैं। गर्भावस्था में आयरन बहुत जरूरी है। आयरन गर्भवती महिला को सेहतमंद बनाये रखने में मदद करता है। गर्भावस्था में जो महिलायें पर्याप्त मात्रा में आयरन का सेवन नहीं करती, उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता। साथ ही उनके होने वाले शिशु पर भी इसका विपरीत प्रभाव पड़ता है। अंगूर का सेवन ____________________________________________________ प्रेंग्नेंसी में काले और ताजे अंगूरों का रस नियमित रुप से एक गिलास लेने से गर्भस्थ शिशु को काफी फायदा होता है। इससे उसका रक्त भी शुद्ध होता है तथा वह कई बीमारियों से भी बचा रहता है। साथ ही उसकी त्वचा भी निखरती है। गाजर का जूस ____________________________________________________ गर्भावस्था में गाजर का रस महिलाओं में रक्त की कमी को तो पूरा करता ही है साथ ही सलाद में कच्चे गाजर का सेवन करने से मां का स्वास्थ्य अच्छा होता है। इसके साथ ही इससे शिशु का स्वास्थ्य और उसकी त्वचा को भी लाभ पहुंचता है। चुकंदर खाएं ____________________________________________________ चुकंदर जल्द ही रक्त की कमी को पूरा करने में कारगर साबित होता है। गर्भवती महिलाओं को चुकंदर का जूस पीना चाहिए यह रक्त संचार का बढ़ाने के साथ रंग भी निखारता है। दूध में केसर व बादाम ___________________________________________________ गर्भावस्था में महिलाओं को दूध में केसर-बादाम मिलाकर पीना चाहिए। इससे बच्चे का रंग निखरता है और बच्चा स्वस्थ्य पैदा होता है। केसर औषधीय गुणों की खान होता है। केसर मां और बच्चे दोनों अनार का जूस ____________________________________________________ अनार का जूस पीने से गर्भवती महिला का रक्त संचार बढता है साथ ही शिशु का रंग भी निखरता है। अनार आयरन का भी भरपूर स्रोत होता है। इससे मां और शिशु दोनों की हड्डियां मजबूत होती हैं। इसके साथ ही आपको चाहिए कि आप तनाव से दूर रहें। अधिक क्रोध करने से बचें। क्रोध और तनाव न केवल आपके स्वास्थ्य पर बुरा असर डालते हैं, बल्कि आपके होने वाले शिशु की सेहत के लिए भी वे अच्छे नहीं होते। गर्भवती महिलाओं को इसके साथ ही धूम्रपान और शराब का सेवन भी नहीं करना चाहिए। महिला को चाहिए कि डॉक्टर से पूछकर अपने लिए कारगर व्यायाम भी पता करे। व्यायाम भी महिला और शिशु के लिए फायदेमंद होते हैं।

Sunday, June 19, 2016

हमारी चिकित्सा पद्धति


दुनिया में हमारा देश अनोखा देश है जिसकी चिकित्सा प्रणाली ये सिखाती है कि आप बीमार ही न पड़ो। दुनिया में 100 से ज्यादा चिकित्सा पद्धतियाँ है जिनके मूल में ये है कि पहले आप बीमार पड़ो फिर चिकित्सा होगी। जैसे एलोपेथी में :-पहले बुखार होगा फिर बुखार की दवा दी जायेगी। दर्द होगा फिर दर्द की दवा दी जायेगी । लेकिन भारत देश की प्राचीन चिकित्सा पद्धति जिसे आयुर्वेद कहा जाता है उसके मूल में यह है कि आप बीमार ही मत पड़ो। इसके लिए कुछ नियमों का पालन करना पड़ेगा। जिनको अपना कर जीवन भर स्वस्थ रहा जा सकता है । पूरी जिंदगी डॉक्टर की कहीं भी आवश्यकता नहीं पड़ती। तो बिना डॉक्टर व बिना दवा के जीना केवल आयुर्वेद ही सिखाती है। सर्वे सुखिन:सन्तु,सर्वे सन्तु निरामय:| सर्वे भद्राणि पश्यंतु ,मा कश्चित् दु:ख भाग्भवेत्||

Saturday, June 18, 2016

**एसिडिटी हो या फिर हाइपर एसिडिटी इसका सबसे आसान इलाज**

क्या आप जानते हैं, एसिडिटी की दवा से हो सकती हैं आपकी किडनी खराब। जब हम खाना खाते हैं तो इस को पचाने के लिए शरीर में एसिड बनता हैं। जिस की मदद से ये भोजन आसानी से पांच जाता हैं। ये ज़रूरी भी हैं। मगर कभी कभी ये एसिड इतना ज़्यादा मात्रा में बनता हैं के इसकी वजह से सर दर्द, सीने में जलन और पेट में अलसर और अलसर के बाद कैंसर तक होने की सम्भावना हो जाती हैं। ऐसे में हम नियमित ही घर में इनो या पीपीआई (प्रोटॉन पंप इनहिबिटर्स) दवा का सेवन करते रहते हैं। मगर आपको जान कर आश्चर्य होगा के ये दवाये सेहत के लिए बहुत खतरनाक हैं। पीपीआई ब्लड में मैग्नीशियम की कमी कर देता है। अगर खून पर असर पड़ रहा है तो किडनी पर असर पड़ना लाज़मी है। जिसका सीधा सा अर्थ की ये दवाये हमारी सेहत के लिए खतरनाक हैं। हमने कई ऐसे मूर्ख लोग भी देखे हैं जो एसिडिटी होने पर कोल्ड ड्रिंक पेप्सी या कोका कोला पीते हैं ये सोच कर के इस से एसिडिटी कंट्रोल होगा। ऐसे लोगो को भगवान ही बचा सकता हैं। तो ऐसी स्थिति में कैसे करे इस एसिडिटी का इलाज। आज हम आपको बता रहे हैं भयंकर से भयंकर एसिडिटी का चुटकी बजाते आसान सा इलाज। ये इलाज आपकी सोच से कई गुना ज़्यादा कारगार हैं।

Wednesday, June 15, 2016

**सिर्फ सात दिन में बवासीर 🌰 की छुट्टी, आजमाकर देख लीजिए**

यह नुस्खा एक महात्मा से प्राप्त हुआ और मरीजो पर प्रयोग करने पर 100 में से 90 मरीज लाभान्वित हुए यानि कि 90 प्रतिशत सफल है तो आइये जाने आप उस नुस्खे के बारे में।
औषिधि बनाने की विधि :अरीठे या रीठा (Soap nut) के फल में से बीज निकाल कर शेष भाग को लोहे की कढाई में डालकर आंच पर तब तक चढ़ाए रखे जब तक वह कोयला न बन जाए जब वह जल कर कोयले की तरह हो जाए तब आंच पर से उतार कर सामान मात्रा में पपडिया कत्थामिलाकर कपडछन (सूती कपडे से छान कर) चूर्ण कर ले बस अब ये औषिधि तैयार है।

 औषिधि सेवन करने का तरीका :
इस तैयार औषिधि में से एक रत्ती (125मिलीग्राम ) लेकर मक्खन या मलाई के साथ सुबह-शाम लेते रहे, इस प्रकार सात दिन तक दवाई लेनी होती है।
इस औषिधि के मात्र सात दिन तक लेते रहने से ही कब्ज, बवासीर की खुजली, बवासीर से खून बहना आदि दूर होकर मरीज को राहत महसूस करने लगता है।
यदि मरीज इस रोग के लिए सदा के लिए छुटकारा पाना चाहे तो उन्हें हर छ: महीने के बाद फिर से 7 दिन का यह कोर्स बिलकुल इसी प्रकार दोहरा लेना चाहिए।
 अरीठे या रीठा (Soap Nut) के अन्य भाषा में नाम :
• संस्कृत - अरिष्ट ,रक्तबीज,मागल्य
• हिन्दी- रीठा,अरीठा ,
• गुजराती- अरीठा
• मराठी- रीठा
• मारवाड़ी-अरीठो
• पंजाबी- रेठा
• कर्नाटक-कुकुटेकायि
 औषिधि सेवन के दौरान परहेज़ :
ध्यान रखे की औषिधि लेते समय सात दिन नमक का सेवन बिलकुल नहीं करना है ।
देशी इलाज में पथ्यापथ्य का विशेष ध्यान रखा जाता है कई रोगों में तो दवाई से ज्यादा तो पथ्य आहार जादा कारगर होता है।
 औषिधि सेवन के दौरान क्या-क्या खाएं :
मुंग या चने की दाल, कुल्थी की दाल, पुराने चावलों का भात, सांठी चावल, बथुआ, परवल, तोरई, करेला, कच्चा पपीता, गुड, दूध, घी, मक्खन, काला नमक, सरसों का तेल, पका बेल, सोंठ आदि पथ्य है। रोगी को दवा सेवन काल में इसका ही सेवन करना चाहिए।
 औषिधि सेवन के दौरान क्या-क्या न खाएं :
उड़द, धी, सेम, भारी तथा भुने पदार्थ, घिया, धूप या ताप, अपानुवायु को रोकना, साइकिल की सवारी, सहवास, कड़े आसन पर बैठना आदि ये सभी बवासीर के लिए हानिकारक है।
 कृपया शेयर करना ना भूले क्योंकि यह जानकारी किसी जरुरत मंद के लिये उपयोगी सिद्ध हो सकती 

गुड़ और चना को साथ में खाने से होते है ये अद्भुत फायदे

घरेलू नुस्खे कम समय में शरीर को आराम पहुंचाते हैं और साथ ही यह सेहत को भी ठीक रखते हैं। हम सब सर्दियों में गुड खाते है। गुड़ और चना दोनों ही सेहत के लिए बहुत लाभदायक हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन दोनों को साथ मिलाकर खाने से कई बड़ी बीमारियों को दूर किया जा सकता है। गुड और चना के बहुत से लाभ होते है।
गुड़ और चना साथ खाने के क्या हैं फायदे :1. खून की कमी में फायदेमंद : कई बार कब्ज की समस्या को दूर करने के लिए लोग गुड़ और चने खाना पसंद करते हैं। लेकिन इसके अलावा गुड़ और चना एनीमिया रोग दूर करने में काफी मददगार साबित होता है।
2. आयरन की मात्रा से हैं भरपूर : गुड़ और चना आयरन से भरपूर होता है और यही कारण है कि एनीमिया से बचने के लिए यह बेहद मददगार साबित होता है। गुड़ में उच्च मात्रा में आयरन होता है और भुने हुए चने में आयरन के साथ-साथ प्रोटीन भी सही मात्रा में पाया जाता है। इस तरह से गुड़ और चने को मिलाकर खाने से आवश्यक तत्वों की कमी पूरी होती है, जो एनीमिया रोग के लिए जिम्मेदार होते हैं।
3. बॉडी को मिलती है एनर्जी : गुड़ और चना न केवल आपको एनीमिया से बचाने का काम करते हैं, बल्कि आपके शरीर में उर्जा की पूर्ति भी करते हैंl शरीर में आयरन अवशोषित होने पर ऊर्जा का संचार होता है, जिससे थकान और कमजोरी महसूस नहीं होती।
Note : हालांकि अत्यधिक मात्रा में भी इसका सेवन आपके भोजन की आदत को प्रभावित कर सकता है। इसलिए इसे नियमित रूप से और नियंत्रित मात्रा में खाना अधिक फायदेमंद रहता है।

Tuesday, June 14, 2016

OTHER SOLUTION FOR ACTIVE PERSION

* बच्चों की काली खाँसी ठीक न होने पर बाँस का एक टुकड़ा जलाकर भस्म को शहद में मिलाकर तीन-चार बार चटाने से बच्चे की खाँसी 3-4 दिन में ठीक हो जाती है।
* घर से निकलते समय एक गिलास ठंडा पानी पी लिया करें। धूप में से आने के बाद तुरंत ठंडा पानी न पिएँ। एक साबुत प्याज जेब में रख लिया करें, इससे लू नहीं लगेगी।
* भोजन शुरू करने से एक घंटा पहले पानी न पिएँ, इससे जठराग्नि बुझ जाती है।
* आधा गिलास पालक के रस में 1 चम्मच शहद मिलाकर 50 दिनों तक सेवन करने से शरीर का रक्त (खून) साफ हो जाता है।
* दस मिनट तक कच्चे पपीता का पेस्ट सिर में लगाएं। बाल नहीं झड़ेंगे और डेंड्रफ (रूसी) भी नहीं होगी।
* रात में नींद न आती हो तो मलाई में गुड़ मिलाकर खाएँ और पानी पी लें। थोड़ी देर में नींद आ जाएगी।
* एक प्याला करेले के रस में एक बड़ा चम्मच आँवले का रस मिलाकर रोज पीने से दो महीने में मधुमेह के कष्टों से आराम मिल जाता है।
* दाल चीनी पावडर पानी मे डालकर पीने से पानी की कमी दूर होती है। पानी में डालकर नहाने से सौदर्य बढ़ता है और भीनी-भीनी खुशबू आती है।
* काली मिर्च 5 दाने सुबह-शाम लेने से सफ़ेद दाग में फ़ायदा होता है।
* शहद और नींबू का शर्बत पीने से थकान दूर होती है और कोलेस्ट्राल कम हो जाता है। शहद में मोटे और पतले होने अर्थात दोनों के गुण होते हैं।

How to effect mango for health

फलों का ‪#‎राजा‬ है और यह आपको इस बुरे मौसम से बचाने के लिए तैयार है| फलों का ‪#‎राजा‬ है और यह आपको इस बुरे मौसम से बचाने के लिए तैयार है| आम स्वाद और सुगंध में तो अच्छा होता ही है इसके साथ ही यह आपकी त्वचा के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है| आमत्वचा के काले धब्बे, रंग में असमानता और मुँहासों को दूर करता है साथ ही इससे त्वचा में नयी चमक आ जाती है| इसमें पाया जाने वाला बीटा कैरोटीन और इसके कई अन्य पोषक तत्व आपकी त्वचा को फिर से जवान बना देते हैं| स्वाद और सुगंध में तो अच्छा होता ही है इसके साथ ही यह आपकी त्वचा के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है| आमत्वचा के काले धब्बे, रंग में असमानता और मुँहासों को दूर करता है साथ ही इससे त्वचा में नयी चमक आ जाती है| इसमें पाया जाने वाला बीटा कैरोटीन और इसके कई अन्य पोषक तत्व आपकी त्वचा को फिर से जवान बना देते हैं|

Monday, June 13, 2016

‪**‎अंजीर‬ का ये ‪#‎आयुर्वेदिक‬ उपाय दिलाएंगे आपको ‪#‎निरोगी‬ काया**

अंजीर एक ऐसा फल है जो जितना मीठा है। उतना ही लाभदायक भी है।अंजीर के सूखे फल बहुत गुणकारी होते हैं। अंजीर खाने से कब्ज दूर हो जाती है। गैस और एसीडिटी से भी राहत मिलती है। साधारण कब्ज में गरम दूध में सूखे अंजीर उबाल कर सेवन से सुबह दस्त साफ होता है। इससे कफ बाहर आ जाता है। सूखे अंजीर को उबाल कर बारीक पीस कर गले की सुजन या गांठ पर बांधी जाए तो लाभ पहुंचता है। ताजे अंजीर खा कर साथ दूध का सेवन करना शक्तिवर्धक होता है। डायबिटीज के रोगी को अंजीर से लाभ पहुंचता है।
1 कब्ज:- *3 से 4 पके अंजीर दूध में उबालकर रात्रि में सोने से पूर्व खाएं और ऊपर से उसी दूध का सेवन करें। इससे कब्ज और बवासीर में लाभ होता है।
*माजून अंजीर 10 ग्राम को सोने से पहले लेने से कब्ज़ में लाभ होता है।
*अंजीर 5 से 6 पीस को 250 मिलीलीटर पानी में उबाल लें, पानी को छानकर पीने से कब्ज (कोष्ठबद्धता) में राहत मिलती है।
*अंजीर को रात को पानी में भिगोकर सुबह चबाकर खाकर ऊपर से पानी पीने पेट साफ हो जाता है।
*अंजीर के 4 दाने रात को सोते समय पानी में डालकर रख दें। सुबह उन दानों को थोड़ा सा मसलकर जल पीने से अस्थमा में बहुत लाभ मिलता है तथा इससे कब्ज भी नष्ट हो जाती है।
2 दमा :- *दमा जिसमें कफ (बलगम) निकलता हो उसमें अंजीर खाना लाभकारी है। इससे कफ बाहर आ जाता है तथा रोगी को शीघ्र ही आराम भी मिलता है।
*प्रतिदिन थोड़े-थोड़े अंजीर खाने से पुरानी कब्जियत में मल साफ और नियमित आता है। 2 से 4 सूखे अंजीर सुबह-शाम दूध में गर्म करके खाने से कफ की मात्रा घटती है, शरीर में नई शक्ति आती है और दमा (अस्थमा) रोग मिटता है।”
3 प्यास की अधिकता :- बार-बार प्यास लगने पर अंजीर का सेवन करें।
4 मुंह के छाले :– अंजीर का रस मुंह के छालों पर लगाने से आराम मिलता है।
5 प्रदर रोग :- अंजीर का रस 2 चम्मच शहद के साथ प्रतिदिन सेवन करने से दोनों प्रकार के प्रदर रोग नष्ट हो जाते हैं।
6 दांतों का दर्द :- *अंजीर का दूध रुई में भिगोकर दुखते दांत पर रखकर दबाएं। *अंजीर के पौधे से दूध निकालकर उस दूध में रुई भिगोकर सड़ने वाले दांतों के नीचे रखने से दांतों के कीड़े नष्ट होते हैं तथा दांतों का दर्द मिट जाता है।”
7 पेशाब का अधिक आना :– 3-4 अंजीर खाकर, 10 ग्राम काले तिल चबाने से यह कष्ट दूर होता है।
8 त्वचा के विभिन्न रोग :- *कच्चे अंजीर का दूध समस्त त्वचा सम्बंधी रोगों में लगाना लाभदायक होता है।
*अंजीर का दूध लगाने से दिनाय (खुजली युक्त फुंसी) और दाद मिट जाते हैं। बादाम और छुहारे के साथ अंजीर को खाने से दाद, दिनाय (खुजली युक्त फुंसी) और चमड़ी के सारे रोग ठीक हो जाते है।”
9 दुर्बलता (कमजोरी) :– *पके अंजीर को बराबर की मात्रा में सौंफ के साथ चबा-चबाकर सेवन करें। इसका सेवन 40 दिनों तक नियमित करने से शारीरिक दुर्बलता दूर हो जाती है।
*अंजीर को दूध में उबालकर-उबाला हुआ अंजीर खाकर वही दूध पीने से शक्ति में वृद्धि होती है तथा खून भी बढ़ता है।”
10 रक्तवृद्धि और शुद्धि हेतु :– 10 मुनक्के और 5 अंजीर 200 मिलीलीटर दूध में उबालकर खा लें। फिर ऊपर से उसी दूध का सेवन करें। इससे रक्तविकार दूर हो जाता है।
11 पेचिश और दस्त :– अंजीर का काढ़ा 3 बार पिलाएं।
12 ताकत को बढ़ाने वाला :– सूखे अंजीर के टुकड़े और छिली हुई बादाम गर्म पानी में उबालें। इसे सुखाकर इसमें दानेदार शक्कर, पिसी इलायची, केसर, चिरौंजी, पिस्ता और बादाम बराबर मात्रा में मिलाकर 8दिन तक गाय के घी में पड़ा रहने दें। बाद में रोजाना सुबह 20 ग्राम तक सेवन करें। छोटे बालकों की शक्तिक्षीण के लिए यह औषधि बड़ी हितकारी है।
13 जीभ की सूजन :– सूखे अंजीर का काढ़ा बनाकर उसका लेप करने से गले और जीभ की सूजन पर लाभ होता है।
14 पुल्टिश :– ताजे अंजीर कूटकर, फोड़े आदि पर बांधने से शीघ्र आराम होता है।
15 दस्त साफ लाने के लिए :– दो सूखे अंजीर सोने से पहले खाकर ऊपर से पानी पीना चाहिए। इससे सुबह साफ दस्त होता है।
16 क्षय यानी टी.बी के रोग :– इस रोग में अंजीर खाना चाहिए। अंजीर से शरीर में खून बढ़ता है। अंजीर की जड़ और डालियों की छाल का उपयोग औषधि के रूप में होता है। खाने के लिए 2 से 4 अंजीर का प्रयोग कर सकते हैं।
17 फोड़े-फुंसी :– अंजीर की पुल्टिस बनाकर फोड़ों पर बांधने से यह फोड़ों को पकाती है।
18 गिल्टी :– अंजीर को चटनी की तरह पीसकर गर्म करके पुल्टिस बनाएं। 2-2 घंटे के अन्तराल से इस प्रकार नई पुल्टिश बनाकर बांधने से `बद´ की वेदना भी शांत होती है एवं गिल्टी जल्दी पक जाती है।
19 सफेद कुष्ठ (सफेद दाग) :– *अंजीर के पेड़ की छाल को पानी के साथ पीस लें, फिर उसमें 4 गुना घी डालकर गर्म करें। इसे हरताल की भस्म के साथ सेवन करने से श्वेत कुष्ठ मिटता है।
*अंजीर के कच्चे फलों से दूध निकालकर सफेद दागों पर लगातार 4 महीने तक लगाने से यह दाग मिट जाते हैं।
*अंजीर के पत्तों का रस श्वेत कुष्ठ (सफेद दाग) पर सुबह और शाम को लगाने से लाभ होता है।
*अंजीर को घिसकर नींबू के रस में मिलाकर सफेद दाग पर लगाने से लाभ होता है।”
20 गले के भीतर की सूजन :– सूखे अंजीर को पानी में उबालकर लेप करने से गले के भीतर की सूजन मिटती है।
21 श्वासरोग :– अंजीर और गोरख इमली (जंगल जलेबी) 5-5 ग्राम एकत्रकर प्रतिदिन सुबह को सेवन करने से हृदयावरोध (दिल की धड़कन का अवरोध) तथा श्वासरोग का कष्ट दूर होता है।
22 शरीर की गर्मी :– पका हुआ अंजीर लेकर, छीलकर उसके आमने-सामने दो चीरे लगाएं। इन चीरों में शक्कर भरकर रात को ओस में रख दें। इस प्रकार के अंजीर को 15 दिनों तक रोज सुबह खाने से शरीर की गर्मी निकल जाती है और रक्तवृद्धि होती है।
23 जुकाम :– पानी में 5 अंजीर को डालकर उबाल लें और इसे छानकर इस पानी को गर्म-गर्म सुबह और शाम को पीने से जुकाम में लाभ होता है।
24 फेफड़ों के रोग :– फेफड़ों के रोगों में पांच अंजीर एक गिलास पानी में उबालकर छानकर सुबह-शाम पीना चाहिए।
25 मसूढ़ों से खून का आना :– अंजीर को पानी में उबालकर इस पानी से रोजाना दो बार कुल्ला करें। इससे मसूढ़ों से आने वाला खून बंद हो जाता है तथा मुंह से दुर्गन्ध आना बंद हो जाती है।
26 तिल्ली (प्लीहा) के रोग में :– अंजीर 20 ग्राम को सिरके में डुबोकर सुबह और शाम रोजाना खाने से तिल्ली ठीक हो जाती है।
27 खांसी :– *अंजीर का सेवन करने से सूखी खांसी दूर हो जाती है। अंजीर पुरानी खांसी वाले रोगी को लाभ पहुंचाता है क्योंकि यह बलगम को पतला करके बाहर निकालता रहता है।
*2अंजीर के फलों को पुदीने के साथ खाने से सीने पर जमा हुआ कफ धीरे-धीरे निकल जाएगा।
*पके अंजीर का काढ़ा पीने से खांसी दूर हो जाती है।”
28 गुदा चिरना :– सूखा अंजीर 350 ग्राम, पीपल का फल 170 ग्राम, निशोथ 87.5 ग्राम, सौंफ 87.5 ग्राम, कुटकी 87.5 ग्राम और पुनर्नवा 87.5 ग्राम। इन सब को मिलाकर कूट लें और कूटे हुए मिश्रण के कुल वजन का 3 गुने पानी के साथ उबालें। एक चौथाई पानी बच जाने पर इसमें 720 ग्राम चीनी डालकर शर्बत बना लें। यह शर्बत 1 से 2 चम्मच प्रतिदिन सुबह-शाम पीयें।
29 बवासीर (अर्श) :- *सूखे अंजीर के 3-4 दाने को शाम के समय जल में डालकर रख दें। सुबह उन अंजीरों को मसलकर प्रतिदिन सुबह खाली पेट खाने से अर्श (बवासीर) रोग दूर होता है।
*अंजीर को गुलकन्द के साथ रोज सुबह खाली पेट खाने से शौच के समय पैखाना (मल) आसानी से होता है।”
30 कमर दर्द :– अंजीर की छाल, सोंठ, धनियां सब बराबर लें और कूटकर रात को पानी में भिगो दें। सुबह इसके बचे रस को छानकर पिला दें। इससे कमर दर्द में लाभ होता है।
31 आंवयुक्त पेचिश :- पेचिश तथा आवंयुक्त दस्तों में अंजीर का काढ़ा बनाकर पीने से रोगी को लाभ होता है।
32 अग्निमान्द्य (अपच) होने पर :– अंजीर को सिरके में भिगोकर खाने से भूख न लगना और अफारा दूर हो जाता है।
33 प्रसव के समय की पीड़ा :– प्रसव के समय में 15-20 दिन तक रोज दो अंजीर दूध के साथ खाने से लाभ होता है।
34 बच्चों का यकृत (जिगर) बढ़ना :– 4-5 अंजीर, गन्ने के रस के सिरके में गलने के लिए डाल दें। 4-5 दिन बाद उनको निकालकर 1 अंजीर सुबह-शाम बच्चे को देने से यकृत रोग की बीमारी से आराम मिलता है।
35 फोड़ा (सिर का फोड़ा) :– फोड़ों और उसकी गांठों पर सूखे अंजीर या हरे अंजीर को पीसकर पानी में औटाकर गुनगुना करके लगाने से फोड़ों की सूजन और फोड़े ठीक हो जाते हैं।
36 दाद :– अंजीर का दूध लगाने से दाद ठीक हो जाता है।
37 सिर का दर्द :– सिरके या पानी में अंजीर के पेड़ की छाल की भस्म मिलाकर सिर पर लेप करने से सिर का दर्द ठीक हो जाता है।
38 सर्दी (जाड़ा) अधिक लगना :- लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग की मात्रा में अंजीर को खिलाने से सर्दी या शीत के कारण होने वाले हृदय और दिमाग के रोगों में बहुत ज्यादा फायदा मिलता है।
39 खून और वीर्यवद्धक :- *सूखे अंजीर के टुकड़ों एवं बादाम के गर्भ को गर्म पानी में भिगोकर रख दें फिर ऊपर से छिलके निकालकर सुखा दें। उसमें मिश्री, इलायची के दानों की बुकनी, केसर, चिरौंजी, पिस्ते और बलदाने कूटकर डालें और गाय के घी में 8 दिन तक भिगोकर रखें। यह मिश्रण प्रतिदिन लगभग 20 ग्राम की मात्रा में खाने से कमजोर शक्ति वालों के खून और वीर्य में वृद्धि होती है।
*एक सूखा अंजीर और 5-10 बादाम को दूध में डालकर उबालें। इसमें थोड़ी चीनी डालकर प्रतिदिन सुबह पीने से खून साफ होता है, गर्मी शांत होती है, पेट साफ होता है, कब्ज मिटती है और शरीर बलवान बनता है।
*अंजीर को अधिक मात्रा में सेवन करने से शरीर शक्तिशाली होता है, और मनुष्य के संभोग करने की क्षमता भी बढ़ती है।
अंजीर अपने खट्टे-मीठे स्वाद के लिए प्रसिद्ध अंजीर एक स्वादिष्ट, स्वास्थ्यवर्धक और बहु उपयोगी फल है।अंजीर कई प्रकार का होता है जिसमें से कुछ इस प्रकार के हैं।वैज्ञानिकों के अनुसार अंजीर कि इसके सूखे फल में कार्बोहाइड्रेट (शर्करा) 63 प्रतिशत, प्रोटीन 5.5 प्रतिशत, सेल्यूलोज 7.3 प्रतिशत, चिकनाई एक प्रतिशत, खनिज लवण 3 प्रतिशत, अम्ल 1.2 प्रतिशत, राख 2.3 प्रतिशत और जल 20.8 प्रतिशत होता है। इसके अलावा प्रति 100 ग्राम अंजीर में लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग लोहा, विटामिन,थोड़ी मात्रा में चूना, पोटैशियम, सोडियम, गंधक, फास्फोरिक एसिड और गोंद भी पाया जाता है।

Tuesday, June 7, 2016

आयुर्वेद

दांतों की बीमारी का उपचार :
-10 सेंधा नमक बारीक पीसकर कपड़-छान
कर लें। उसमें से दो ग्राम नमक हथेली पर रखकर चार
गुना सरसों का तेल डालकर मिश्रण तैयार करें। बाद में नमक तेल के
मिश्रण से अंगुली द्वारा दांत एवं
मसूड़ों की रोजाना सुबह हल्की मालिश करें
तथा बाद में सादे या गुनगुने पानी से कुल्ला कर लें। इससे
दांतों का ठंडा, गर्म और खट्टा लगना समाप्त हो जाता है।
-आंवला जलाकर सरसों के तेल में मिलाएं
इसे मसूड़ों पर धीरे-धीरे मलें
- नीम की पत्तियां, काली मिर्च
और काला नमक मिलाकर पीस लें
इसका नियमित सेवन करें
- खस, इलायची और लौंग का तेल मिलाकर मसूड़ों में लगाएं
- जीरा, सेंधा नमक, हरड़,
दालचीनी,
दक्षिणी सुपारी को समान मात्रा में लें
इसे बंद बर्तन में जलाकर पीस लें इस मंजन का नियमित
प्रयोग करें
- फिटकरी और काला नमक बारीक
पीसकर दांतों पर मलें।
-कीड़ा लगने से बचने का सबसे
सही तरीका है कि रात को ब्रश करके सोएं।
मीठी और स्टार्च
आदि की चीजें कम खाएं और बार - बार न
खाएं। मीठी चीजें खाने के बाद
कुल्ला करें या ब्रश करें।
दांतों की अच्छी तरह सफाई करें।
-नीम का दातुन करने से पहले उसे
अच्छी तरह चबाते रहें। जब दातुन
का अगला हिस्सा नरम हो जाए तो फिर उसमें दांत धीरे -
धीरे साफ करें।
- लहसुन बैक्टीरिया को मारने के लिए एक प्राकृतिक
हथियार है। कच्चे लहसुन का रस संक्रमण को मारने में मदद
करता है। यदि वास्तव में आपके दांत में बहुत अधिक दर्द
हो रहा हो तो आप ऐसा कर सकते हैं। कच्चे लहसुन
की एक कली लें। इसे पीसें और
निचोड़ें तथा इसका रस निकालें। इस रस को प्रभावित क्षेत्र पर लगायें।
यह घरेलू उपचार दांत के दर्द में जादू की तरह काम
करता है।
-एक टेबलस्पून नारियल का तेल लें और इसे अपने मुंह में चलायें।
इसे निगले नहीं, इसे लगभग 30 मिनिट तक अपने मुंह
में रखें रहें। फिर इसे थूक दें और मुंह धो लें। आपको निश्चित रूप से
आराम मिलेगा।
-दांत के दर्द में पेपरमिंट आईल जादू की तरह काम
करता है। अपनी उँगलियों के पोरों पर कुछ तेल लें तथा इसे
धीरे धीरे प्रभावित क्षेत्र पर मलें।
आपको दांत के दर्द से तुरंत आराम मिलेगा।
-. टी बैग टी बैग एक अन्य घरेलू उपचार
है। हर्बल टी बैग को प्रभावित क्षेत्र पर लगायें।
इससे पस के कारण होने वाले दर्द से आपको तुरंत आराम मिलेगा।
-ओरेगानो आईल में एंटी बैक्टीरियल,
एंटी फंगल, एंटी ऑक्सीडेंट
और एंटी वाइरल गुणधर्म होते हैं। यह घरेलू उपचार में
बहुत प्रभावकारी होता है विशेष रूप से दांतों और
मसूड़ों की बीमारियों में।
-दांतों में पस होने पर ऐप्पल सीडर विनेगर एक अन्य
प्रभावशाली उपचार है। चाहे वह प्राकृतिक
हो या ऑर्गेनिक, यह बहुत अधिक प्रभावशाली है।
एक टेबलस्पून ए सी वी लें। इसे कुछ समय
के लिए अपने मुंह में रखें और फिर इसे थूक दें। इसे निगलें
नहीं। इससे प्रभावित क्षेत्र रोगाणुओं से मुक्त
हो जाएगा। इससे सूजन भी कम होती

Sunday, June 5, 2016

आयुर्वेद से डैंड्रफ दूर करने के उपाय

डैंड्रफ की समस्या होने पर स्कॉल्प
की सफाई का ध्यान
रखना आवश्यक है। इसीलिए सप्ताह में दो-
तीन बार
अच्छा हर्बल शैंपू करना चाहिए और
बालों को अच्छी तरह से
मालिश करनी चाहिए।
शैम्पू की जगह ये करे:: आंवला, रीठा और
शिकाकाई
तीनो का एक एक चम्म्च एक मग गर्म
पानी में घोल ले और
एक घण्टे बाद इसे शैम्पू की जगह लगाए
• रोज रात को बालों की जड़ों में सरसों के तेल से मालिश
कीजिए। सुबह शिकाकाई पानी में उबाल कर
उस पानी से बाल
धो लें।
• ग्लीसरीन और गुलाब जल को रोज
बालों की जड़ों में लगाने से
ये समस्या दूर हो सकती है।
• डैंड्रफ से बचने के लिए जैतून के तेल में अदरक के रस
की कुछ बूंदे मिलाकर इसे बालों की जड़ों में
लगाकर एक घंटे के
लिए छोड़ दें और फिर शैंपू से धो दें।
• आँवला,शिकाकाई पावडर को दही में मिलाए। यह मिश्रण
बालों में लगाने से बालों की डीप
कंडीशनिंग होती है।
• बालों में तेल लगाने के बाद स्टीम्ड तौलिए का प्रयोग
करना भी अच्छा रहता है या फिर गर्म तेल से स्कॉल्प
की मसाज करने से सिर की त्वचा को पोषण
मिलता है।
• बालों को बार-बार कंघी मत कीजिए,
नहीं तो स्कॉल्प से
ज्यादा ऑयल निकलने से डेंड्रफ
की समस्या भी बढ़ जाती है।
• खाने-पीने का खासा ध्यान
रखना जरूरी होता है। ऐसे में खूब
पानी पीना चाहिए।
• दही को बालों में कम से कम आधे घंटे तक लगाने से
डैंड्रफ
को दूर किया जा सकता है।
• नीबू का रस और काली मिर्च पाउडर
मिलाकर
बालों की जड़ों में लगाना भी अच्छा रहता है।
• अधिक स्ट्रांग तेल बालों का झड़ना बढ़ा सकता है। ऐसे में
जड़ीबूटी युक्त नीम और काले
तिल का तेल मिलाकर अधिक
डैंड्रफ होने पर सप्ताह में कम से कम तीन बार
लगाएं।
• आयुर्वेदिक शैंपू डैंड्रफ दूर करने के लिए अच्छा विकल्प है।
• नारियल के तेल में कपूर मिलाकर लगाने से डैंड्रफ दूर
होता है।
• दही से सिर धोने पर भी डेंड्रफ से
छुटकारा पाया जा सकता है।
डेंड्रफ के कारण ::
• बालों की ठीक तरह से सफाई न करना,
बालों को सही पोषण
न मिलना या फिर बालों में तेल न लगाने से डेंड्रफ
हो सकती है।
• पेट साफ़ न होना या कब्ज भी डेंड्रफ़ का कारण
होता है
• अधिक तनाव या पसीने के कारण भी ये
समस्या पनप
सकती है।
• हालांकि डेंड्रफ का कोई पुख्ता कारण मौजूद नहीं है,
लेकिन
सीबम उत्पन्न करने वाली ग्रंथियों के
ज्यादा सक्रिय होने
की वजह से डेंड्रफ होता है।
• कम पानी पीने या फिर भोजन में पोषक
तत्वों की कमी के
कारण भी डेंड्रफ हो सकता है।
• युवावस्था में अधिक मात्रा में हॉर्मोंन्स रिलीज होने से
भी डैंड्रफ हो सकती है।
++++++
“जन-जागरण लाना है तो पोस्ट को Share करना है।”

Friday, June 3, 2016

****जन्म*****


हमारे पुराने आयुर्वेद ग्रंथों में पुत्र-पुत्री प्राप्ति हेतु दिन-रात, शुक्ल पक्ष-कृष्ण पक्ष तथा माहवारी के दिन से सोलहवें दिन तक का महत्व बताया गया है। धर्म ग्रंथों में भी इस बारे में जानकारी मिलती है। हम यहाँ माहवारी के बाद की विभिन्न रात्रियों की महत्वपूर्ण जानकारी दे रहे हैं। * चौथी रात्रि के गर्भ से पैदा पुत्र अल्पायु और दरिद्र होता है। * पाँचवीं रात्रि के गर्भ से जन्मी कन्या भविष्य में सिर्फ लड़की पैदा करेगी। * छठवीं रात्रि के गर्भ से मध्यम आयु वाला पुत्र जन्म लेगा। * सातवीं रात्रि के गर्भ से पैदा होने वाली कन्या बांझ होगी। * आठवीं रात्रि के गर्भ से पैदा पुत्र ऐश्वर्यशाली होता है। * नौवीं रात्रि के गर्भ से ऐश्वर्यशालिनी पुत्री पैदा होती है। * दसवीं रात्रि के गर्भ से चतुर पुत्र का जन्म होता है। * ग्यारहवीं रात्रि के गर्भ से चरित्रहीन पुत्री पैदा होती है। * बारहवीं रात्रि के गर्भ से पुरुषोत्तम पुत्र जन्म लेता है। * तेरहवीं रात्रि के गर्म से वर्णसंकर पुत्री जन्म लेती है। * चौदहवीं रात्रि के गर्भ से उत्तम पुत्र का जन्म होता है। * पंद्रहवीं रात्रि के गर्भ से सौभाग्यवती पुत्री पैदा होती है। * सोलहवीं रात्रि के गर्भ से सर्वगुण संपन्न, पुत्र पैदा होता है। व्यास मुनि ने इन्हीं सूत्रों के आधार पर पर अम्बिका, अम्बालिका तथा दासी के नियोग (समागम) किया, जिससे धृतराष्ट्र, पाण्डु तथा विदुर का जन्म हुआ। महर्षि मनु तथा व्यास मुनि के उपरोक्त सूत्रों की पुष्टि स्वामी दयानंद सरस्वती ने अपनी पुस्तक 'संस्कार विधि' में स्पष्ट रूप से कर दी है। प्राचीनकाल के महान चिकित्सक वाग्भट तथा भावमिश्र ने महर्षि मनु के उपरोक्त कथन की पुष्टि पूर्णरूप से की है। * दो हजार वर्ष पूर्व के प्रसिद्ध चिकित्सक एवं सर्जन सुश्रुत ने अपनी पुस्तक सुश्रुत संहिता में स्पष्ट लिखा है कि मासिक स्राव के बाद 4, 6, 8, 10, 12, 14 एवं 16वीं रात्रि के गर्भाधान से पुत्र तथा 5, 7, 9, 11, 13 एवं 15वीं रात्रि के गर्भाधान से कन्या जन्म लेती है। * 2500 वर्ष पूर्व लिखित चरक संहिता में लिखा हुआ है कि भगवान अत्रिकुमार के कथनानुसार स्त्री में रज की सबलता से पुत्री तथा पुरुष में वीर्य की सबलता से पुत्र पैदा होता है। * प्राचीन संस्कृत पुस्तक 'सर्वोदय' में लिखा है कि गर्भाधान के समय स्त्री का दाहिना श्वास चले तो पुत्री तथा बायां श्वास चले तो पुत्र होगा। * यूनान के प्रसिद्ध चिकित्सक तथा महान दार्शनिक अरस्तु का कथन है कि पुरुष और स्त्री दोनों के दाहिने अंडकोष से लड़का तथा बाएं से लड़की का जन्म होता है। * चन्द्रावती ऋषि का कथन है कि लड़का-लड़की का जन्म गर्भाधान के समय स्त्री-पुरुष के दायां-बायां श्वास क्रिया, पिंगला-तूड़ा नाड़ी, सूर्यस्वर तथा चन्द्रस्वर की स्थिति पर निर्भर करता है

"मौत को छोड कर हर मर्ज की दवाई है कलौंजी"

कलयुग में धरती पर संजीवनी है कलौंजी, अनगिनत रोगों को चुटकियों में ठीक करती है।
[A] कैसे करें इसका सेवन?
कलौंजी के बीजों का सीधा सेवन किया जा सकता है।
एक छोटा चम्मच कलौंजी को शहद में मिश्रित करके इसका सेवन करें।
पानी में कलौंजी उबालकर छान लें और इसे पिएँ।
दूध में कलौंजी उबालें। ठंडा होने दें फिर इस मिश्रण को पिएँ।
कलौंजी को ग्राइंड करें व पानी तथा दूध के साथ इसका सेवन करें।
कलौंजी को ब्रैड, पनीर तथा पेस्ट्रियों पर छिड़क कर इसका सेवन करें।
[B] ये किन-किन रोगों में सहायक है?
1/. टाइप-2 डायबिटीज:
प्रतिदिन 2 ग्राम कलौंजी के सेवन के परिणामस्वरूप तेज हो रहा ग्लूकोज कम होता है। इंसुलिन रैजिस्टैंस घटती है,बीटा सैल की कार्यप्रणाली में वृद्धि होती है तथा ग्लाइकोसिलेटिड हीमोग्लोबिन में कमी आती है।
2/. मिर्गी:
2007 में हुए एक अध्ययन के अनुसार मिर्गी से पीड़ित बच्चों में कलौंजी के सत्व का सेवन दौरे को कम करता है।
3/. उच्च रक्तचाप:
100 या 200 मि.ग्रा. कलौंजी के सत्व के दिन में दो बार सेवन से हाइपरटैंशन के मरीजों में ब्लड प्रैशर कम होता है।
रक्तचाप (ब्लडप्रेशर) में एक कप गर्म पानी में आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर दिन में 2 बार पीने से रक्तचाप सामान्य बना रहता है। तथा 28 मि.ली. जैतुन का तेल और एक चम्मच
कलौंजी का तेल मिलाकर पूर शरीर पर मालिश आधे घंटे तक धूप में रहने से रक्तचाप में लाभ मिलता है। यह क्रिया हर तीसरे दिन एक महीने तक करना चाहिए।
4/. गंजापन:
जली हुई कलौंजी को हेयर ऑइल में मिलाकर नियमित रूप से सिर पर मालिश करने से गंजापन दूर होकर बाल उग आते हैं।
5/. त्वचा के विकार:
कलौंजी के चूर्ण को नारियल के तेल में मिलाकर त्वचा पर मालिश करने से त्वचा के विकार नष्ट होते हैं।
6/. लकवा:
कलौंजी का तेल एक चौथाई चम्मच की मात्रा में एक कप दूध के साथ कुछ महीने तक प्रतिदिन पीने और रोगग्रस्त अंगों पर कलौंजी के तेल से मालिश करने से लकवा रोग ठीक होता है।
7/. कान की सूजन, बहरापन:
कलौंजी का तेल कान में डालने से कान की सूजन दूर होती है। इससे बहरापन में भी लाभ होता है।
8/. सर्दी-जुकाम:
कलौंजी के बीजों को सेंककर और कपड़े में लपेटकर सूंघने से और कलौंजी का तेल और जैतून का तेल बराबर की मात्रा में नाक में टपकाने से सर्दी-जुकाम समाप्त होता है। आधा कप पानी में आधा चम्मच कलौंजी का तेल व चौथाई चम्मच जैतून का तेल मिलाकर इतना उबालें कि पानी खत्म हो जाए और केवल तेल ही रह जाए। इसके बाद इसे छानकर 2 बूंद नाक में डालें। इससे सर्दी-जुकाम
ठीक होता है। यह पुराने जुकाम भी लाभकारी होता है।
9/. कलौंजी को पानी में उबालकर इसका सत्व पीने से अस्थमा में काफी अच्छा प्रभाव पड़ता है।
10/. छींके:
कलौंजी और सूखे चने को एक साथ अच्छी तरह मसलकर किसी कपड़े में बांधकर सूंघने से छींके आनी बंद हो जाती है।
11/. पेट के कीडे़:
दस ग्राम कलौंजी को पीसकर 3 चम्मच शहद के साथ रात सोते समय कुछ दिन तक नियमित रूप से सेवन करने से पेट के कीडे़ नष्ट हो जाते हैं।
12/. प्रसव की पीड़ा:
कलौंजी का काढ़ा बनाकर सेवन करने से प्रसव की पीड़ा दूर होती है।
13/. पोलियों का रोग:
आधे कप गर्म पानी में एक चम्मच शहद व आधे चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर सुबह खाली पेट और रात को सोते समय लें। इससे पोलियों का रोग ठीक होता है।
14/. मुँहासे:
सिरके में कलौंजी को पीसकर रात को सोते समय पूरे चेहरे पर लगाएं और सुबह पानी से चेहरे को साफ करने से मुंहासे कुछ दिनों में ही ठीक हो जाते हैं।
15/. स्फूर्ति:
स्फूर्ति (रीवायटल) के लिए नांरगी के रस में आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर सेवन करने से आलस्य और थकान दूर होती है।
16/. गठिया:
कलौंजी को रीठा के पत्तों के साथ काढ़ा बनाकर पीने से गठिया रोग समाप्त होता है।
17/. जोड़ों का दर्द:
एक चम्मच सिरका, आधा चम्मच कलौंजी का तेल और दो चम्मच शहद मिलाकर सुबह खाली पेट और रात को सोते समय पीने से जोड़ों का दर्द ठीक होता है।
18/. आँखों के सभी रोग:
आँखों की लाली, मोतियाबिन्द, आँखों से पानी का आना, आँखों की रोशनी कम होना आदि। इस तरह के आँखों के रोगों में एक कप गाजर का रस, आधा चम्मच कलौंजी का तेल और दो चम्मच शहद मिलाकर दिन में 2बार सेवन करें। इससे आँखों के सभी रोग ठीक होते हैं। आँखों के चारों और तथा पलकों पर कलौंजी का तेल रात को सोते समय लगाएं। इससे आँखों के रोग समाप्त होते हैं। रोगी को अचार, बैंगन, अंडा व मछली नहीं खाना चाहिए।
19/. स्नायुविक व मानसिक तनाव:
एक कप गर्म पानी में आधा चम्मच कलौंजी का तेल डालकर रात को सोते समय पीने से स्नायुविक व मानसिक तनाव दूर होता है।
20/. गांठ:
कलौंजी के तेल को गांठो पर लगाने और एक चम्मच कलौंजी का तेल गर्म दूध में डालकर पीने से गांठ नष्ट होती है।
21/. मलेरिया का बुखार:
पिसी हुई कलौंजी आधा चम्मच और एक चम्मच शहद मिलाकर चाटने से मलेरिया का बुखार ठीक होता है।
22/. स्वप्नदोष:
यदि रात को नींद में वीर्य अपने आप निकल जाता हो तो एक कप सेब के रस में आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर दिन में 2 बार सेवन करें। इससे स्वप्नदोष दूर होता है। प्रतिदिन कलौंजी के तेल की चार बूंद एक चम्मच नारियल तेल में मिलाकर सोते समय सिर में लगाने स्वप्न दोष का रोग ठीक होता है। उपचार करते समय नींबू का सेवन न करें।
23/. कब्ज:
चीनी 5 ग्राम, सोनामुखी 4 ग्राम, 1 गिलास हल्का गर्म दूध और आधा चम्मच कलौंजी का तेल। इन सभी को एक साथ मिलाकर रात को सोते समय पीने से कब्ज नष्ट होती है।
24/. खून की कमी:
एक कप पानी में 50 ग्राम हरा पुदीना उबाल लें और इस पानी में आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर सुबह खाली पेट एवं रात को सोते समय सेवन करें। इससे 21 दिनों में खून की कमी दूर होती है। रोगी को खाने में खट्टी वस्तुओं का उपयोग नहीं करना चाहिए।
25/. पेट दर्द:
किसी भी कारण से पेट दर्द हो एक गिलास नींबू पानी में 2 चम्मच शहद और आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर दिन में 2 बार पीएं। उपचार करते समय रोगी को बेसन की चीजे नहीं खानी चाहिए। या चुटकी भर नमक और आधे चम्मच कलौंजी के तेल को आधा गिलास हल्का गर्म
पानी मिलाकर पीने से पेट का दर्द ठीक होता है। या फिर 1 गिलास मौसमी के रस में 2 चम्मच शहद और आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर दिन में 2 बार पीने से पेट का दर्द समाप्त होता है।
26/. सिर दर्द:
कलौंजी के तेल को ललाट से कानों तक अच्छी तरह मलनें और आधा चम्मच कलौंजी के तेल को 1 चम्मच शहद में मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से सिर दर्द ठीक होता है। कलौंजी खाने के साथ सिर पर कलौंजी का तेल और जैतून का तेल मिलाकर मालिश करें। इससे सिर दर्द में आराम मिलता है और सिर से सम्बंधित अन्य रोगों भी दूर होते हैं।
कलौंजी के बीजों को गर्म करके पीस लें और कपड़े में बांधकर सूंघें। इससे सिर का दर्द दूर होता है।
कलौंजी और काला जीरा बराबर मात्रा में लेकर पानी में पीस लें और माथे पर लेप करें। इससे सर्दी के कारण होने वाला सिर का दर्द दूर होता है।
27/. उल्टी:
आधा चम्मच कलौंजी का तेल और आधा चम्मच अदरक का रस मिलाकर सुबह-शाम पीने से उल्टी बंद होती है।
28/. हार्निया:
तीन चम्मच करेले का रस और आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर सुबह खाली पेट एवं रात को सोते समय पीने से हार्निया रोग ठीक होता है।
29/. मिर्गी के दौरें:
एक कप गर्म पानी में 2 चम्मच शहद और आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर दिन में तीन बार सेवन करने से मिर्गी के दौरें ठीक होते हैं। मिर्गी के रोगी को ठंडी चीजे जैसे- अमरूद, केला, सीताफल आदि नहीं देना चाहिए।
30/. पीलिया:
एक कप दूध में आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर प्रतिदिन 2 बार सुबह खाली पेट और रात को सोते समय 1 सप्ताह तक लेने से पीलिया रोग समाप्त होता है। पीलिया से पीड़ित रोगी को खाने में मसालेदार व खट्टी वस्तुओं का उपयोग नहीं करना चाहिए।
31/. कैंसर का रोग:
एक गिलास अंगूर के रस में आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर दिन में 3 बार पीने से कैंसर का रोग ठीक होता है। इससे आंतों का कैंसर, ब्लड कैंसर व गले का कैंसर आदि में भी लाभ मिलता है। इस रोग में रोगी को औषधि देने के साथ ही एक किलो जौ के आटे में 2 किलो गेहूं का आटा मिलाकर इसकी रोटी, दलिया बनाकर रोगी को देना चाहिए। इस रोग में आलू, अरबी और बैंगन का सेवन नहीं करना चाहिए। कैंसर के रोगी को कलौंजी डालकर हलवा बनाकर खाना चाहिए।
32/. दांत:
कलौंजी का तेल और लौंग का तेल 1-1 बूंद मिलाकर दांत व मसूढ़ों पर लगाने से दर्द ठीक होता है। आग में सेंधानमक जलाकर बारीक पीस लें और इसमें 2-4 बूंदे कलौंजी का तेल डालकर दांत साफ करें। इससे साफ व स्वस्थ रहते हैं।
दांतों में कीड़े लगना व खोखलापन: रात को सोते समय कलौंजी के तेल में रुई को भिगोकर खोखले दांतों में रखने से कीड़े नष्ट होते हैं।
33/. नींद:
रात में सोने से पहले आधा चम्मच कलौंजी का तेल और एक चम्मच शहद मिलाकर पीने से नींद अच्छी आती है।
34/. मासिकधर्म:
कलौंजी आधा से एक ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम सेवन करने से मासिकधर्म शुरू होता है। इससे गर्भपात होने की संभावना नहीं रहती है।
जिन माताओं बहनों को मासिकधर्म कष्ट से आता है उनके लिए कलौंजी आधा से एक ग्राम की मात्रा में सेवन करने से मासिकस्राव का कष्ट दूर होता है और बंद मासिकस्राव शुरू हो जाता है।
कलौंजी का चूर्ण 3 ग्राम की मात्रा में शहद मिलाकर चाटने से ऋतुस्राव की पीड़ा नष्ट होती है।
मासिकधर्म की अनियमितता में लगभग आधा से डेढ़ ग्राम की मात्रा में कलौंजी के चूर्ण का सेवन करने से मासिकधर्म नियमित समय पर आने लगता है।
यदि मासिकस्राव बंद हो गया हो और पेट में दर्द रहता हो तो एक कप गर्म पानी में आधा चम्मच कलौंजी का तेल और दो चम्मच शहद मिलाकर सुबह-शाम पीना चाहिए। इससे बंद मासिकस्राव शुरू हो जाता है।
कलौंजी आधा से एक ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन 2-3 बार सेवन करने से मासिकस्राव शुरू होता है।
35/. गर्भवती महिलाओं को वर्जित:
*गर्भवती महिलाओं को इसका सेवन नहीं कराना चाहिए क्योंकि इससे गर्भपात हो सकता है।*
36/. स्तनों का आकार:
कलौंजी आधे से एक ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन सुबह-शाम पीने से स्तनों का आकार बढ़ता है और स्तन सुडौल बनता है।
37/. स्तनों में दूध:
कलौंजी को आधे से 1 ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन सुबह-शाम खाने से स्तनों में दूध बढ़ता है।
38/. स्त्रियों के चेहरे व हाथ-पैरों की सूजन:
कलौंजी पीसकर लेप करने से हाथ पैरों की सूजन दूर होती है।
39/. बाल लम्बे व घने:
50 ग्राम कलौंजी 1 लीटर पानी में उबाल लें और इस पानी से बालों को धोएं इससे बाल लम्बे व घने होते हैं।
40/. बेरी-बेरी रोग:
बेरी-बेरी रोग में कलौंजी को पीसकर हाथ-पैरों की सूजन पर लगाने से सूजन मिटती है।
41/. भूख का अधिक लगना:
50 ग्राम कलौंजी को सिरके में रात को भिगो दें और सूबह पीसकर शहद में मिलाकर 4-5 ग्राम की मात्रा सेवन करें। इससे भूख का अधिक लगना कम होता है।
42/. नपुंसकता:
कलौंजी का तेल और जैतून का तेल मिलाकर पीने से नपुंसकता दूर होती है।
43/. खाज-खुजली:
50 ग्राम कलौंजी के बीजों को पीस लें और इसमें 10 ग्राम बिल्व के पत्तों का रस व 10 ग्राम हल्दी मिलाकर लेप बना लें। यह लेप खाज-खुजली में प्रतिदिन लगाने से रोग ठीक होता है।
44/. नाड़ी का छूटना:
नाड़ी का छूटना के लिए आधे से 1 ग्राम कालौंजी को पीसकर रोगी को देने से शरीर का ठंडापन दूर होता है और नाड़ी की गति भी तेज होती है। इस रोग में आधे से 1 ग्राम कालौंजी हर 6 घंटे पर लें और ठीक होने पर इसका प्रयोग बंद कर दें। कलौंजी को पीसकर लेप करने से नाड़ी की जलन व सूजन दूर होती है।
45/. हिचकी:
एक ग्राम पिसी कलौंजी शहद में मिलाकर चाटने से हिचकी आनी बंद हो जाती है। तथा कलौंजी आधा से एक ग्राम की मात्रा में मठ्ठे के साथ प्रतिदिन 3-4 बार सेवन से हिचकी दूर होती है। या फिर कलौंजी का चूर्ण 3 ग्राम मक्खन के साथ खाने से हिचकी दूर होती है। और यदि
3 ग्राम कलौंजी पीसकर दही के पानी में मिलाकर खाने से हिचकी ठीक होती है।
46/. स्मरण शक्ति:
लगभग 2 ग्राम की मात्रा में कलौंजी को पीसकर 2 ग्राम शहद में मिलाकर सुबह-शाम खाने से स्मरण शक्ति बढ़ती है।
47/. पेट की गैस:
कलौंजी, जीरा और अजवाइन को बराबर मात्रा में पीसकर एक चम्मच की मात्रा में खाना खाने के बाद लेने से पेट की गैस नष्ट होता है।
48/. पेशाब की जलन:
250 मिलीलीटर दूध में आधा चम्मच कलौंजी का तेल और एक चम्मच शहद मिलाकर पीने से पेशाब की जलन दूर होती है।

गुर्दे की सूजनकारण और उपाय

कभी-कभी गुर्दे में खराबी के कारण गुर्दे (वृक्क) अपने सामान्य आकार से बड़े हो जाते हैंऔर उसमें दर्द होता है। इस तरह गुर्दे को फूल जाने को गुर्दे की सूजन कहते हैं। इसमें दर्दगुर्दे के स्थान से चलकर कमर तक फैल जाता है।
***
*लक्षण :
गुर्दे रोगग्रस्त होने से रोगी का पेशाब पीले रंग का होता है। इस रोग से पीड़ित रोगी का शरीर भी पीला पड़ जाता है, पलकेसूज जाती हैं, पेशाब करते समय कष्ट होता है, पेशाब रुक-रुककर आता, कभी-कभी अधिक मात्रा में पेशाब आता, पेशाब के साथ खून आता हैऔरपेशाब के साथ धातु आता (मूत्रघात) है। इस रोग से पीड़ित रोगी में कभी-कभी बेहोशी के लक्षण भी दिखाई देते हैं।
*भोजन तथा परहेज :
गुर्दे की सूजन से पीड़ित रोगी को भोजन करने के बाद तुरन्त पेशाब करना चाहिए। इससे गुर्दे की बीमारी, कमरदर्द, जिगर के रोग, गठिया, पौरुष ग्रंथि की वृद्धि आदि अनेक बीमारियों से बचाव होता है।ज्यादा मात्रा में दूध, दही, पनीर व दूध से बनीकोई भी वस्तु न खाएं। इस रोग से पीड़ित रोगी को ज्यादा मांस, मछली, मुर्गा, ज्यादा पोटेशियम वाले पदार्थ, चॉकलेट, काफी, दूध, चूर्ण, बीयर, वाइन आदि का सेवन नहीं करना चाहिए।इस रोग में सूखे फल, सब्जी, केक, पेस्ट्री, नमकीन, मक्खन आदि नहीं खाना चाहिए।
*विभिन्न औषधियों से उपचार
*1. फिटकरी : भुनी हुई फिटकरी 1 ग्राम दिन में कम से कम 3 बार लेने से गुर्दे की सूजन दूर होती है।
*2. दालचीनी :दालचीनी खाने से गुर्दे की बीमारी मिटती है।
*3. सत्यानाशी : सत्यानाशी का दूध सेवन करने से गुर्दे का दर्द, पेशाब की परेशानी आदि दूर होती है।
*4. तुलसी : छाया में सुखाया हुआ 20 ग्राम तुलसीका पत्ता, अजवायन 20 ग्राम और सेंधानमक 10 ग्राम को पीसकर चूर्ण बना लें और यह चूर्ण प्रतिदिन सुबह-शाम 2-2 ग्राम की मात्रा में गुनगुने पानी के साथ लें। इसके सेवन से गुर्दे की सूजन के कारण उत्पन्न दर्द व बैचनीदूर होती है।
*5. नारंगी : सुबह नाश्ते से पहले 1-2 नांरगी खाकर गर्म पानी पीना चाहिए या नारंगी का रस पीना चाहिए। इससे गुर्दे की सूजन व अन्य रोग ठीक होता है। नारंगी गुर्दो को साफ रखने में उपयोगी होता है। गुर्दे के रोग में सेब और अंगूर का उपयोग करना भी लाभकारी होता है। गुर्दो को स्वस्थ रखने के लिए सुबह खाली पेट फलों का रस उपयोग करें।
*6. गाजर : गुर्दे के रोग से पीड़ित रोगी को गाजर के बीज 2 चम्मच 1 गिलास पानी में उबालकर पीना चाहिए। इससे पेशाब की रुकावट दूर होती है और गुर्दे की सूजन दूर होती है।
*7. बथुआ : गुर्दे के रोग में बथुआ फायदेमन्द होता है। पेशाब कतरा-कतरा सा आता हो या पेशाब रुक-रुककर आता हो तो इसका रस पीने से पेशाब खुलकर आने लगता है।
*8. अरबी : गुर्दे के रोग और गुर्दे की कमजोरी आदि को दूर करने के लिए अरबी खाना फायदेमन्द होता है।
*9. तरबूज : गुर्दे के सूजन में तरबूज खाना फायदेमन्द होता है।
*10. ककड़ी : गाजर और ककड़ी या गाजर और शलजम का रस पीने से गुर्दे की सूजन, दर्द व अन्य रोग ठीक होते हैं। यह मूत्र रोग के लिए भी लाभकारी होता है।
*11. आलू : गुर्दे के रोगी को आलू खाना चाहिए। इसमें सोडियम की मात्रा बहुत पायी जाती है औरपोटेशियम की मात्रा कम होती है।
*12. चंदन : चंदन के तेल की 5 से 10 बूंद बताशे परडालकर दूध के साथ प्रतिदिन 3 बार खाने से गुर्दे की सूजन दूर होती है और दर्द शान्त होता है।
*13. सिनुआर : सिनुआर के पत्तों का रस 10 से 20 मिलीलीटर सुबह-शाम खाने से गुर्दे की सूजन मिटती है। साथ ही सिनुआर, करन्ज, नीम और धतूरे के पत्तों को पीसकर हल्का गर्म करके गुर्दे के स्थान पर बांधने से लाभ मिलता है।
*14. हुरहुर : पीले फूलों वाली हुरहुर के पत्तों को पीसकर नाभि के बाएं व दाएं तरफ लेप करने से फायदा होता है।16. कलमीशोरा : कलमीशोरा लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग से लगभग 1 ग्राम की मात्रा में गोखरू के काढ़े के साथ मिलाकर सुबह-शाम पीने से लाभ मिलता है। यह गुर्दे की पथरी के साथ होने वाले दर्द को दूर करता है।
*15. आम : प्रतिदिन आम खाने से गुर्दे की कमजोरीदूर होती है।18. मकोय : मकोय का रस 10-15 मिलीलीटर की मात्रामें प्रतिदिन सेवन करने से पेशाब की रुकावट दूर होती है। इससे गुर्दे और मूत्राशय की सूजन व पीड़ा दूर होती है।
*16. जंगली प्याज : कन्द का चूर्ण, ककड़ी के बीज और त्रिफला का चूर्ण बराबर मात्रा में मिलाकर आधा चम्मच दिन में 2 बार सुबह-शाम प्रतिदिन खिलाने से गुर्दे के रोग में आराम मिलता है।
*17. मूली :गुर्दे की खराबी से यदि पेशाब बनना बन्द हो गया हो तो मूली का रस 20-40 मिलीलीटर दिन में 2से 3 बार पीना चाहिए।पेशाब में धातु का आना (मूत्राघात) रोग में मूली खाना लाभकारी होता है।मूली के पत्तों का रस 10-20 मिलीलीटर और कलमीशोरा का रस 1-2 मिलीलीटर को मिलाकर रोगी को पिलाने से पेशाब साफ आता है और गुर्दे की सूजन दूर होती है।प्रतिदिन आधा गिलास मूली का रस पीने से पेशाबके समय होने वाली जलन और दर्द दूर होता है।
*18. अडूसा (वासा): अडूसे और नीम के पत्ते को गर्म करके नाभि के निचले भाग पर सिंकाई करें और अडूसे के पत्तों का 5 मिलीलीटर रस व शहद 5 ग्राम मिलाकर पीने से गुर्दे के भयंकर दर्द तुरन्त ठीक होता है।
*19. पान: पान का सेवन करने से गुर्दे की सूजन व अन्य रोग में लाभ मिलता है।
*20. पुनर्नवा : पुनर्नवा के 10 से 20 मिलीलीटर पंचांग (जड़, तना, पत्ती, फल और फूल) का काढ़ा सेवन करने से गुर्दे के रोगों में बेहद लाभकारी होता है।
*21. नींबू :नींबू के पेड़ की जड़ का चूर्ण 1 ग्राम पानी के साथ दिन में 2 बार सेवन करने से गुर्दे की बीमारी में लाभ मिलता है।लौकी के टुकड़े-टुकड़े करके गर्म करके दर्द वाले जगह पर रखने और इसके रस से मालिश करने से गुर्दे का दर्द जल्द ठीक होता है।
*22 लौकी : लौकी के रस से गुर्दे वाले स्थान पर मालिश करने और पीस करके लेप करने से गुर्दे का दर्द तुरन्त कम हो जाता है।
*23. अंगूर : अंगूर की बेल के 30 ग्राम पत्ते को पीसकर नमक मिले पानी में मिलाकर पीने से गुर्दे का दर्द ठीक होता है।
*24. अपामार्ग : अपामार्ग की 5-10 ग्राम ताजी जड़को पानी में घोलकर गुर्दे के दर्द से पीड़ित रोगी को पिलाने से दर्द में तुरन्त आराम मिलता है। यह औषधि मूत्राशय की पथरी को टुकड़े-टुकड़े करके निकाल देती है।
*25. एरण्ड : एरण्ड की मींगी को पीसकर गर्म करकेगुर्दे वाले स्थान पर लेप करने से गुर्दे की सूजन व दर्द ठीक होता है।

Thursday, June 2, 2016

**आयुर्वेद से डैंड्रफ दूर करने के उपाय**

 डैंड्रफ की समस्या होने पर स्कॉल्प
की सफाई का ध्यान
रखना आवश्यक है। इसीलिए सप्ताह में दो-
तीन बार
अच्छा हर्बल शैंपू करना चाहिए और
बालों को अच्छी तरह से
मालिश करनी चाहिए।
शैम्पू की जगह ये करे:: आंवला, रीठा और
शिकाकाई
तीनो का एक एक चम्म्च एक मग गर्म
पानी में घोल ले और
एक घण्टे बाद इसे शैम्पू की जगह लगाए
• रोज रात को बालों की जड़ों में सरसों के तेल से मालिश
कीजिए। सुबह शिकाकाई पानी में उबाल कर
उस पानी से बाल
धो लें।
• ग्लीसरीन और गुलाब जल को रोज
बालों की जड़ों में लगाने से
ये समस्या दूर हो सकती है।
• डैंड्रफ से बचने के लिए जैतून के तेल में अदरक के रस
की कुछ बूंदे मिलाकर इसे बालों की जड़ों में
लगाकर एक घंटे के
लिए छोड़ दें और फिर शैंपू से धो दें।
• आँवला,शिकाकाई पावडर को दही में मिलाए। यह मिश्रण
बालों में लगाने से बालों की डीप
कंडीशनिंग होती है।
• बालों में तेल लगाने के बाद स्टीम्ड तौलिए का प्रयोग
करना भी अच्छा रहता है या फिर गर्म तेल से स्कॉल्प
की मसाज करने से सिर की त्वचा को पोषण
मिलता है।
• बालों को बार-बार कंघी मत कीजिए,
नहीं तो स्कॉल्प से
ज्यादा ऑयल निकलने से डेंड्रफ
की समस्या भी बढ़ जाती है।
• खाने-पीने का खासा ध्यान
रखना जरूरी होता है। ऐसे में खूब
पानी पीना चाहिए।
• दही को बालों में कम से कम आधे घंटे तक लगाने से
डैंड्रफ
को दूर किया जा सकता है।
• नीबू का रस और काली मिर्च पाउडर
मिलाकर
बालों की जड़ों में लगाना भी अच्छा रहता है।
• अधिक स्ट्रांग तेल बालों का झड़ना बढ़ा सकता है। ऐसे में
जड़ीबूटी युक्त नीम और काले
तिल का तेल मिलाकर अधिक
डैंड्रफ होने पर सप्ताह में कम से कम तीन बार
लगाएं।
• आयुर्वेदिक शैंपू डैंड्रफ दूर करने के लिए अच्छा विकल्प है।
• नारियल के तेल में कपूर मिलाकर लगाने से डैंड्रफ दूर
होता है।
• दही से सिर धोने पर भी डेंड्रफ से
छुटकारा पाया जा सकता है।
डेंड्रफ के कारण ::
• बालों की ठीक तरह से सफाई न करना,
बालों को सही पोषण
न मिलना या फिर बालों में तेल न लगाने से डेंड्रफ
हो सकती है।
• पेट साफ़ न होना या कब्ज भी डेंड्रफ़ का कारण
होता है
• अधिक तनाव या पसीने के कारण भी ये
समस्या पनप
सकती है।
• हालांकि डेंड्रफ का कोई पुख्ता कारण मौजूद नहीं है,
लेकिन
सीबम उत्पन्न करने वाली ग्रंथियों के
ज्यादा सक्रिय होने
की वजह से डेंड्रफ होता है।
• कम पानी पीने या फिर भोजन में पोषक
तत्वों की कमी के
कारण भी डेंड्रफ हो सकता है।
• युवावस्था में अधिक मात्रा में हॉर्मोंन्स रिलीज होने से
भी डैंड्रफ हो सकती है।
++++++
“जन-जागरण लाना है तो पोस्ट को Share करना है।”

Wednesday, June 1, 2016

भोजन विधि::

बालों के लिए बनाइये बहुत ही प्रभावी आयुर्वेदिक
तेल :-
आज हम आपके पतले – कमजोर पड़ चुके बालों के लिए एक
विशेष आयुर्वेदिक तेल बनाने की विधि बताएँगे जो
बेजान बालों को घने – काले केशों की घटा में बदल
देगा। घर पर बने इस तेल से आपके बालो को कालापन,
मजबूती, खुश्की, रुसी , बाल झडना आदी से निजात
मिलेगी, थोड़ी सी मेहनत से ये आपको बालो की
होने वाली सभी बीमारियों से निजात दिला
देगा ।
सामग्री :-
====
लौह भस्म – 10 ग्राम
ब्राहमी – 10 ग्राम
लाल चन्दन – 10 ग्राम
आंवला चूर्ण – 25 ग्राम
भ्रंगराज चूर्ण – 25 ग्राम
काफ़ी चूर्ण – 25 ग्राम
मेंहदी के पत्ते – 20 ग्राम ,
जैतून का तैल- 50 ग्राम ,
अरण्डी का तैल – 50 ग्राम ,
नारियल का तैल – 500 ग्राम,
* अब आप तैलो को छॊड कर सभी चूर्ण का पेस्ट बना लें
रात में पेस्ट बना कर रख दें. सुबह लोहे की कडाही में
तीनों तेल डाल कर यह पेस्ट डाल दें अब आप इस में -250
ग्राम पानी डाल दें.अब धीमी आंच पर पकाएं कि
पानी जल जाये और सिर्फ़ तेल बचे उसके बाद भी लगभग
दस मिनट और पकाएं फ़िर ठण्डा होने पर सूती कपडॆ की
चार तह बना कर उस में से निचोड कर छान लें छने हुए तेल
को एक बार फ़िर दो तह के सूती कपडॆ से छानकर रख लें
सप्ताह में कम से कम दो बार इस तेल से रात को हाथों
की अंगुलियों से बालों की जडॊ में अच्छी तरह से
लगायें जिस से तेल त्वचा के अन्दर समा जाए सारी
रात तेल लगा रह ने दें सुबह साफ़ पानी से बालों को
धो लें बाजार के शैम्पू का प्रयोग न करें.

भोजन विधि:

अधिकांश लोग भोजन
की सही विधि नहीं जानते।
गलत विधि से गलत
मात्रा में अर्थात् आवश्यकता से अधिक या बहुत कम भोजन करने से
या अहितकर भोजन करने से जठराग्नि मंद पड़ जाती है,
जिससे कब्ज
रहने लगता है। तब आँतों में रूका हुआ मल सड़कर दूषित रस बनाने
लगता है। यह दूषित रस ही सारे शरीर में
फैलकर विविध प्रकार के
रोग उत्पन्न करता है। उपनिषदों में
भी कहा गया हैः आहारशुद्धौ सत्त्वशुद्धिः। शुद्ध
आहार से मन शुद्ध
रहता है। साधारणतः सभी व्यक्तियों के लिए आहार के
कुछ
नियमों को जानना अत्यंत आवश्यक है। जैसे-
आलस तथा बेचैनी न रहें, मल, मूत्र तथा वायु का निकास
य़ोग्य ढंग
से होता रहे, शरीर में उत्साह उत्पन्न हो एवं
हलकापन महसूस हो,
भोजन के प्रति रूचि हो तब समझना चाहिए की भोजन
पच गया है।
बिना भूख के खाना रोगों को आमंत्रित करता है। कोई
कितना भी आग्रह करे या आतिथ्यवश खिलाना चाहे पर
आप सावधान
रहें।
सही भूख को पहचानने वाले मानव बहुत कम हैं।
इससे भूख न
लगी हो फिर भी भोजन करने से
रोगों की संख्या बढ़ती जाती है।
एक
बार किया हुआ भोजन जब तक पूरी तरह पच न जाय
एवं खुलकर भूख
न लगे तब तक दुबारा भोजन नहीं करना चाहिए।
अतः एक बार आहार
ग्रहण करने के बाद दूसरी बार आहार ग्रहण करने
के बीच कम-से-
कम छः घंटों का अंतर अवश्य रखना चाहिए क्योंकि इस
छः घंटों की अवधि में आहार की पाचन-
क्रिया सम्पन्न होती है।
यदि दूसरा आहार इसी बीच ग्रहण करें
तो पूर्वकृत आहार
का कच्चा रस(आम) इसके साथ मिलकर दोष उत्पन्न कर देगा।
दोनों समय के भोजनों के बीच में बार-बार चाय
पीने, नाश्ता, तामस
पदार्थों का सेवन आदि करने से पाचनशक्ति कमजोर
हो जाती है,
ऐसा व्यवहार में मालूम पड़ता है।
रात्रि में आहार के पाचन के समय अधिक लगता है
इसीलिए रात्रि के
समय प्रथम पहर में ही भोजन कर लेना चाहिए।
शीत ऋतु में रातें
लम्बी होने के कारण सुबह जल्दी भोजन
कर लेना चाहिए और
गर्मियों में दिन लम्बे होने के कारण सायंकाल का भोजन
जल्दी कर
लेना उचित है।
अपनी प्रकृति के अनुसार उचित मात्रा में भोजन
करना चाहिए। आहार
की मात्रा व्यक्ति की पाचकाग्नि और
शारीरिक बल के अनुसार
निर्धारित होती है। स्वभाव से हलके पदार्थ जैसे
कि चचावल, मूँग,
दूध अधिक मात्रा में ग्रहण करने सम्भव हैं परन्तु उड़द,
चना तथा पिट्ठी से बने पदार्थ
स्वभावतः भारी होते हैं, जिन्हें कम
मात्रा में लेना ही उपयुक्त रहता है।
भोजन के पहले अदरक और सेंधा नमक का सेवन
सदा हितकारी होता है। यह
जठराग्नि को प्रदीप्त करता है, भोजन के
प्रति रूचि पैदा करता है तथा जीभ एवं कण्ठ
की शुद्धि भी करता है।
भोजन गरम और स्निग्ध होना चाहिए। गरम भोजन स्वादिष्ट
लगता है, पाचकाग्नि को तेज करता है और शीघ्र पच
जाता है।
ऐसा भोजन अतिरिक्त वायु और कफ को निकाल देता है।
ठंडा या सूखा भोजन देर से पचता है। अत्यंत गरम अन्न बल
का ह्रास करता है। स्निग्ध भोजन शरीर को मजबूत
बनाता है,
उसका बल बढ़ाता है और वर्ण में भी निखार लाता है।
चलते हुए, बोलते हुए अथवा हँसते हुए भोजन
नहीं करना चाहिए।
दूध के झाग बहुत लाभदायक होते हैं। इसलिए दूध खूब उलट-
पुलटकर,
बिलोकर, झाग पैदा करके ही पियें। झागों का स्वाद लेकर
चूसें। दूध में
जितने ज्यादा झाग होंगे, उतना ही वह लाभदायक होगा।
चाय या कॉफी प्रातः खाली पेट
कभी न पियें, दुश्मन को भी न
पिलायें।
एक सप्ताह से अधिक पुराने आटे का उपयोग स्वास्थ्य के लिए
लाभदायक नहीं है।
भोजन कम से कम 20-25 मिनट तक खूब चबा-चबाकर एवं उत्तर
या पूर्व की ओर मुख करके करें।
अच्छी तरह चबाये बिना जल्दी-
जल्दी भोजन करने वाले चिड़चिड़े व
क्रोधी स्वभाव के हो जाते हैं।
भोजन अत्यन्त धीमी गति से
भी नहीं करना चाहिए।
भोजन सात्त्विक हो और पकने के बाद 3-4 घंटे के अंदर
ही कर
लेना चाहिए।
स्वादिष्ट अन्न मन को प्रसन्न करता है, बल व उत्साह बढ़ाता है
तथा आयुष्य की वृद्धि करता है,
जबकि स्वादहीन अन्न इसके विपरीत
असर करता है।
सुबह-सुबह भरपेट भोजन न करके हलका-
फुलका नाश्ता ही करें।
भोजन करते समय भोजन पर माता, पिता, मित्र, वैद्य, रसोइये, हंस,
मोर, सारस या चकोर
पक्षी की दृष्टि पड़ना उत्तम माना जाता है।
किंतु भूखे, पापी,
पाखंडी या रोगी मनुष्य, मुर्गे और कुत्ते
की नज़र
पड़ना अच्छा नहीं माना जाता।
भोजन करते समय चित्त को एकाग्र रखकर सबसे पहले मधुर,
बीच में
खट्टे और नमकीन तथा अंत में तीखे, कड़वे
और कसैले पदार्थ खाने
चाहिए। अनार आदि फल तथा गन्ना भी पहले
लेना चाहिए। भोजन के
बाद आटे के भारी पदार्थ, नये चावल
या चिवड़ा नहीं खाना चाहिए।
पहले घी के साथ कठिन पदार्थ, फिर कोमल व्यंजन और
अंत में
प्रवाही पदार्थ खाने चाहिए।
माप से अधिक खाने से पेट फूलता है और पेट में से आवाज
आती है।
आलस आता है, शरीर भारी होता है। माप
से कम अन्न खाने से शरीर
दुबला होता है और शक्ति का क्षय होता है।
बिना समय के भोजन करने से शक्ति का क्षय होता है,
शरीर अशक्त
बनता है। सिरदर्द और अजीर्ण के भिन्न-भिन्न रोग
होते हैं। समय
बीत जाने पर भोजन करने से वायु से अग्नि कमजोर
हो जाती है।
जिससे खाया हुआ अन्न शायद ही पचता है और
दुबारा भोजन करने
की इच्छा नहीं होती।
जितनी भूख हो उससे आधा भाग अन्न से, पाव भाग जल
से
भरना चाहिए और पाव भाग वायु के आने जाने के लिए
खाली रखना चाहिए। भोजन से पूर्व
पानी पीने से पाचनशक्ति कमजोर
होती है, शरीर दुर्बल होता है। भोजन के
बाद तुरंत पानी पीने से
आलस्य बढ़ता है और भोजन नहीं पचता।
बीच में थोड़ा-
थोड़ा पानी पीना हितकर है। भोजन के बाद
छाछ पीना आरोग्यदायी है।
इससे मनुष्य कभी बलहीन और
रोगी नहीं होता।
प्यासे व्यक्ति को भोजन नहीं करना चाहिए।
प्यासा व्यक्ति अगर
भोजन करता है तो उसे आँतों के भिन्न-भिन्न रोग होते हैं। भूखे
व्यक्ति को पानी नहीं पीना चाहिए।
अन्नसेवन से ही भूख को शांत
करना चाहिए।
भोजन के बाद गीले हाथों से आँखों का स्पर्श
करना चाहिए। हथेली में
पानी भरकर बारी-बारी से
दोनों आँखों को उसमें डुबोने से
आँखों की शक्ति बढ़ती है।
भोजन के बाद पेशाब करने से आयुष्य
की वृद्धि होती है। खाया हुआ
पचाने के लिए भोजन के बाद पद्धतिपूर्वक वज्रासन
करना तथा 10-15 मिनट बायीं करवट लेटना चाहिए(सोयें
नहीं),
क्योंकि जीवों की नाभि के ऊपर
बायीं ओर अग्नितत्त्व रहता है।
भोजन के बाद बैठे रहने वाले के शरीर में आलस्य भर
जाता है।
बायीं करवट लेकर लेटने से शरीर पुष्ट
होता है। सौ कदम चलने वाले
की उम्र बढ़ती है तथा दौड़ने वाले
की मृत्यु उसके पीछे
ही दौड़ती है।
रात्रि को भोजन के तुरंत बाद शयन न करें, 2 घंटे के बाद
ही शयन
करें।
किसी भी प्रकार के रोग में मौन
रहना लाभदायक है। इससे स्वास्थ्य
के सुधार में मदद मिलती है। औषधि सेवन के साथ मौन
का अवलम्बन
हितकारी है।
कुछ उपयोगी बातें-
घी, दूध, मूँग, गेहूँ, लाल साठी चावल,
आँवले, हरड़े, शुद्ध शहद,
अनार, अंगूर, परवल – ये सभी के लिए हितकर हैं।
अजीर्ण एवं बुखार में उपवास हितकर है।
दही, पनीर, खटाई, अचार, कटहल, कुन्द,
मावे की मिठाइयाँ – से
सभी के लिए हानिकारक हैं।
अजीर्ण में भोजन एवं नये बुखार में दूध विषतुल्य है।
उत्तर भारत में
अदरक के साथ गुड़ खाना अच्छा है।
मालवा प्रदेश में सूरन(जमिकंद) को उबालकर काली मिर्च
के साथ
खाना लाभदायक है।
अत्यंत सूखे प्रदेश जैसे की कच्छ, सौराष्ट्र आदि में
भोजन के बाद
पतली छाछ पीना हितकर है।
मुंबई, गुजरात में अदरक, नींबू एवं सेंधा नमक का सेवन
हितकर है।
दक्षिण गुजरात वाले पुनर्नवा(विषखपरा)
की सब्जी का सेवन करें
अथवा उसका रस पियें तो अच्छा है।
दही की लस्सी पूर्णतया हानिकारक
है। दहीं एवं मावे की मिठाई खाने
की आदतवाले पुनर्नवा का सेवन करें एवं नमक
की जगह सेंधा नमक
का उपयोग करें तो लाभप्रद हैं।
शराब पीने की आदवाले अंगूर एवं अनार खायें
तो हितकर है।
आँव होने पर सोंठ का सेवन, लंघन (उपवास)
अथवा पतली खिचड़ी और
पतली छाछ का सेवन लाभप्रद है।
अत्यंत पतले दस्त में सोंठ एवं अनार का रस लाभदायक है।
आँख के रोगी के लिए घी, दूध, मूँग एवं अंगूर
का आहार लाभकारी है।
व्यायाम तथा अति परिश्रम करने वाले के लिए घी और
इलायची के
साथ केला खाना अच्छा है।
सूजन के रोगी के लिए नमक, खटाई, दही,
फल, गरिष्ठ आहार, मिठाई
अहितकर है।
यकृत (लीवर) के रोगी के लिए दूध अमृत के
समान है एवं नमक,
खटाई, दही एवं गरिष्ठ आहार विष के समान हैं।
वात के रोगी के लिए गरम जल, अदरक का रस, लहसुन
का सेवन
हितकर है। लेकिन आलू, मूँग के सिवाय की दालें एवं
वरिष्ठ आहार
विषवत् हैं।
कफ के रोगी के लिए सोंठ एवं गुड़ हितकर हैं परंतु
दही, फल, मिठाई
विषवत् हैं।
पित्त के रोगी के लिए दूध, घी,
मिश्री हितकर हैं परंतु मिर्च-
मसालेवाले तथा तले हुए पदार्थ एवं खटाई विषवत् हैं।
अन्न, जल और हवा से हमारा शरीर
जीवनशक्ति बनाता है। स्वादिष्ट
अन्न व स्वादिष्ट व्यंजनों की अपेक्षा साधारण भोजन
स्वास्थ्यप्रद
होता है। खूब चबा-चबाकर खाने से यह अधिक पुष्टि देता है,
व्यक्ति निरोगी व
दीर्घजीवी होता है। वैज्ञानिक
बताते हैं
कि प्राकृतिक पानी में हाइड्रोजन और
ऑक्सीजन के सिवाय
जीवनशक्ति भी है। एक प्रयोग के अनुसार
हाइड्रोजन व ऑक्सीजन
से कृत्रिम पानी बनाया गया जिसमें खास स्वाद न
था तथा मछली व
जलीय प्राणी उसमें जीवित न
रह सके।
बोतलों में रखे हुए
पानी की जीवनशक्ति क्षीण
हो जाती है। अगर उसे
उपयोग में लाना हो तो 8-10 बार एक बर्तन से दूसरे बर्तन में
उड़ेलना (फेटना) चाहिए। इससे उसमें स्वाद और
जीवनशक्ति दोनों आ
जाते हैं। बोतलों में या फ्रिज में रखा हुआ पानी स्वास्थ्य
का शत्रु है।
पानी जल्दी-
जल्दी नहीं पीना चाहिए।
चुसकी लेते हुए एक-एक घूँट
करके पीना चाहिए जिससे पोषक तत्त्व मिलें।
वायु में भी जीवनशक्ति है। रोज सुबह-शाम
खाली पेट, शुद्ध हवा में
खड़े होकर या बैठकर लम्बे श्वास लेने चाहिए। श्वास
को करीब
आधा मिनट रोकें, फिर धीरे-धीरे छोड़ें। कुछ देर
बाहर रोकें, फिर लें।
इस प्रकार तीन प्राणायाम से शुरुआत करके
धीरे-धीरे पंद्रह तक
पहुँचे। इससे जीवनशक्ति बढ़ेगी,
स्वास्थ्य-लाभ होगा,
प्रसन्नता बढ़ेगी।
पूज्य बापू जी सार बात बताते हैं, विस्तार
नहीं करते। 93 वर्ष तक
स्वस्थ जीवन जीने वाले स्वयं उनके गुरुदेव
तथा ऋषि-मुनियों के
अनुभवसिद्ध ये प्रयोग अवश्य करने चाहिए।
स्वास्थ्य और शुद्धिः
उदय, अस्त, ग्रहण और मध्याह्न के समय सूर्य
की ओर कभी न
देखें, जल में भी उसकी परछाई न देखें।
दृष्टि की शुद्धि के लिए सूर्य का दर्शन करें।
उदय और अस्त होते चन्द्र की ओर न देखें।
संध्या के समय जप, ध्यान, प्राणायाम के सिवाय कुछ भी न
करें।
साधारण शुद्धि के लिए जल से तीन आचमन करें।
अपवित्र अवस्था में और जूठे मुँह स्वाध्याय, जप न करें।
सूर्य, चन्द्र की ओर मुख करके कुल्ला, पेशाब आदि न
करें।
मनुष्य जब तक मल-मूत्र के वेगों को रोक कर रखता है तब तक
अशुद्ध रहता है।
सिर पर तेल लगाने के बाद हाथ धो लें।
रजस्वला स्त्री के सामने न देखें।
ध्यानयोगी ठंडे जल से स्नान न करे।