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Wednesday, June 15, 2016

**सिर्फ सात दिन में बवासीर 🌰 की छुट्टी, आजमाकर देख लीजिए**

यह नुस्खा एक महात्मा से प्राप्त हुआ और मरीजो पर प्रयोग करने पर 100 में से 90 मरीज लाभान्वित हुए यानि कि 90 प्रतिशत सफल है तो आइये जाने आप उस नुस्खे के बारे में।
औषिधि बनाने की विधि :अरीठे या रीठा (Soap nut) के फल में से बीज निकाल कर शेष भाग को लोहे की कढाई में डालकर आंच पर तब तक चढ़ाए रखे जब तक वह कोयला न बन जाए जब वह जल कर कोयले की तरह हो जाए तब आंच पर से उतार कर सामान मात्रा में पपडिया कत्थामिलाकर कपडछन (सूती कपडे से छान कर) चूर्ण कर ले बस अब ये औषिधि तैयार है।

 औषिधि सेवन करने का तरीका :
इस तैयार औषिधि में से एक रत्ती (125मिलीग्राम ) लेकर मक्खन या मलाई के साथ सुबह-शाम लेते रहे, इस प्रकार सात दिन तक दवाई लेनी होती है।
इस औषिधि के मात्र सात दिन तक लेते रहने से ही कब्ज, बवासीर की खुजली, बवासीर से खून बहना आदि दूर होकर मरीज को राहत महसूस करने लगता है।
यदि मरीज इस रोग के लिए सदा के लिए छुटकारा पाना चाहे तो उन्हें हर छ: महीने के बाद फिर से 7 दिन का यह कोर्स बिलकुल इसी प्रकार दोहरा लेना चाहिए।
 अरीठे या रीठा (Soap Nut) के अन्य भाषा में नाम :
• संस्कृत - अरिष्ट ,रक्तबीज,मागल्य
• हिन्दी- रीठा,अरीठा ,
• गुजराती- अरीठा
• मराठी- रीठा
• मारवाड़ी-अरीठो
• पंजाबी- रेठा
• कर्नाटक-कुकुटेकायि
 औषिधि सेवन के दौरान परहेज़ :
ध्यान रखे की औषिधि लेते समय सात दिन नमक का सेवन बिलकुल नहीं करना है ।
देशी इलाज में पथ्यापथ्य का विशेष ध्यान रखा जाता है कई रोगों में तो दवाई से ज्यादा तो पथ्य आहार जादा कारगर होता है।
 औषिधि सेवन के दौरान क्या-क्या खाएं :
मुंग या चने की दाल, कुल्थी की दाल, पुराने चावलों का भात, सांठी चावल, बथुआ, परवल, तोरई, करेला, कच्चा पपीता, गुड, दूध, घी, मक्खन, काला नमक, सरसों का तेल, पका बेल, सोंठ आदि पथ्य है। रोगी को दवा सेवन काल में इसका ही सेवन करना चाहिए।
 औषिधि सेवन के दौरान क्या-क्या न खाएं :
उड़द, धी, सेम, भारी तथा भुने पदार्थ, घिया, धूप या ताप, अपानुवायु को रोकना, साइकिल की सवारी, सहवास, कड़े आसन पर बैठना आदि ये सभी बवासीर के लिए हानिकारक है।
 कृपया शेयर करना ना भूले क्योंकि यह जानकारी किसी जरुरत मंद के लिये उपयोगी सिद्ध हो सकती 

गुड़ और चना को साथ में खाने से होते है ये अद्भुत फायदे

घरेलू नुस्खे कम समय में शरीर को आराम पहुंचाते हैं और साथ ही यह सेहत को भी ठीक रखते हैं। हम सब सर्दियों में गुड खाते है। गुड़ और चना दोनों ही सेहत के लिए बहुत लाभदायक हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन दोनों को साथ मिलाकर खाने से कई बड़ी बीमारियों को दूर किया जा सकता है। गुड और चना के बहुत से लाभ होते है।
गुड़ और चना साथ खाने के क्या हैं फायदे :1. खून की कमी में फायदेमंद : कई बार कब्ज की समस्या को दूर करने के लिए लोग गुड़ और चने खाना पसंद करते हैं। लेकिन इसके अलावा गुड़ और चना एनीमिया रोग दूर करने में काफी मददगार साबित होता है।
2. आयरन की मात्रा से हैं भरपूर : गुड़ और चना आयरन से भरपूर होता है और यही कारण है कि एनीमिया से बचने के लिए यह बेहद मददगार साबित होता है। गुड़ में उच्च मात्रा में आयरन होता है और भुने हुए चने में आयरन के साथ-साथ प्रोटीन भी सही मात्रा में पाया जाता है। इस तरह से गुड़ और चने को मिलाकर खाने से आवश्यक तत्वों की कमी पूरी होती है, जो एनीमिया रोग के लिए जिम्मेदार होते हैं।
3. बॉडी को मिलती है एनर्जी : गुड़ और चना न केवल आपको एनीमिया से बचाने का काम करते हैं, बल्कि आपके शरीर में उर्जा की पूर्ति भी करते हैंl शरीर में आयरन अवशोषित होने पर ऊर्जा का संचार होता है, जिससे थकान और कमजोरी महसूस नहीं होती।
Note : हालांकि अत्यधिक मात्रा में भी इसका सेवन आपके भोजन की आदत को प्रभावित कर सकता है। इसलिए इसे नियमित रूप से और नियंत्रित मात्रा में खाना अधिक फायदेमंद रहता है।

Tuesday, June 14, 2016

OTHER SOLUTION FOR ACTIVE PERSION

* बच्चों की काली खाँसी ठीक न होने पर बाँस का एक टुकड़ा जलाकर भस्म को शहद में मिलाकर तीन-चार बार चटाने से बच्चे की खाँसी 3-4 दिन में ठीक हो जाती है।
* घर से निकलते समय एक गिलास ठंडा पानी पी लिया करें। धूप में से आने के बाद तुरंत ठंडा पानी न पिएँ। एक साबुत प्याज जेब में रख लिया करें, इससे लू नहीं लगेगी।
* भोजन शुरू करने से एक घंटा पहले पानी न पिएँ, इससे जठराग्नि बुझ जाती है।
* आधा गिलास पालक के रस में 1 चम्मच शहद मिलाकर 50 दिनों तक सेवन करने से शरीर का रक्त (खून) साफ हो जाता है।
* दस मिनट तक कच्चे पपीता का पेस्ट सिर में लगाएं। बाल नहीं झड़ेंगे और डेंड्रफ (रूसी) भी नहीं होगी।
* रात में नींद न आती हो तो मलाई में गुड़ मिलाकर खाएँ और पानी पी लें। थोड़ी देर में नींद आ जाएगी।
* एक प्याला करेले के रस में एक बड़ा चम्मच आँवले का रस मिलाकर रोज पीने से दो महीने में मधुमेह के कष्टों से आराम मिल जाता है।
* दाल चीनी पावडर पानी मे डालकर पीने से पानी की कमी दूर होती है। पानी में डालकर नहाने से सौदर्य बढ़ता है और भीनी-भीनी खुशबू आती है।
* काली मिर्च 5 दाने सुबह-शाम लेने से सफ़ेद दाग में फ़ायदा होता है।
* शहद और नींबू का शर्बत पीने से थकान दूर होती है और कोलेस्ट्राल कम हो जाता है। शहद में मोटे और पतले होने अर्थात दोनों के गुण होते हैं।

How to effect mango for health

फलों का ‪#‎राजा‬ है और यह आपको इस बुरे मौसम से बचाने के लिए तैयार है| फलों का ‪#‎राजा‬ है और यह आपको इस बुरे मौसम से बचाने के लिए तैयार है| आम स्वाद और सुगंध में तो अच्छा होता ही है इसके साथ ही यह आपकी त्वचा के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है| आमत्वचा के काले धब्बे, रंग में असमानता और मुँहासों को दूर करता है साथ ही इससे त्वचा में नयी चमक आ जाती है| इसमें पाया जाने वाला बीटा कैरोटीन और इसके कई अन्य पोषक तत्व आपकी त्वचा को फिर से जवान बना देते हैं| स्वाद और सुगंध में तो अच्छा होता ही है इसके साथ ही यह आपकी त्वचा के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है| आमत्वचा के काले धब्बे, रंग में असमानता और मुँहासों को दूर करता है साथ ही इससे त्वचा में नयी चमक आ जाती है| इसमें पाया जाने वाला बीटा कैरोटीन और इसके कई अन्य पोषक तत्व आपकी त्वचा को फिर से जवान बना देते हैं|

Monday, June 13, 2016

‪**‎अंजीर‬ का ये ‪#‎आयुर्वेदिक‬ उपाय दिलाएंगे आपको ‪#‎निरोगी‬ काया**

अंजीर एक ऐसा फल है जो जितना मीठा है। उतना ही लाभदायक भी है।अंजीर के सूखे फल बहुत गुणकारी होते हैं। अंजीर खाने से कब्ज दूर हो जाती है। गैस और एसीडिटी से भी राहत मिलती है। साधारण कब्ज में गरम दूध में सूखे अंजीर उबाल कर सेवन से सुबह दस्त साफ होता है। इससे कफ बाहर आ जाता है। सूखे अंजीर को उबाल कर बारीक पीस कर गले की सुजन या गांठ पर बांधी जाए तो लाभ पहुंचता है। ताजे अंजीर खा कर साथ दूध का सेवन करना शक्तिवर्धक होता है। डायबिटीज के रोगी को अंजीर से लाभ पहुंचता है।
1 कब्ज:- *3 से 4 पके अंजीर दूध में उबालकर रात्रि में सोने से पूर्व खाएं और ऊपर से उसी दूध का सेवन करें। इससे कब्ज और बवासीर में लाभ होता है।
*माजून अंजीर 10 ग्राम को सोने से पहले लेने से कब्ज़ में लाभ होता है।
*अंजीर 5 से 6 पीस को 250 मिलीलीटर पानी में उबाल लें, पानी को छानकर पीने से कब्ज (कोष्ठबद्धता) में राहत मिलती है।
*अंजीर को रात को पानी में भिगोकर सुबह चबाकर खाकर ऊपर से पानी पीने पेट साफ हो जाता है।
*अंजीर के 4 दाने रात को सोते समय पानी में डालकर रख दें। सुबह उन दानों को थोड़ा सा मसलकर जल पीने से अस्थमा में बहुत लाभ मिलता है तथा इससे कब्ज भी नष्ट हो जाती है।
2 दमा :- *दमा जिसमें कफ (बलगम) निकलता हो उसमें अंजीर खाना लाभकारी है। इससे कफ बाहर आ जाता है तथा रोगी को शीघ्र ही आराम भी मिलता है।
*प्रतिदिन थोड़े-थोड़े अंजीर खाने से पुरानी कब्जियत में मल साफ और नियमित आता है। 2 से 4 सूखे अंजीर सुबह-शाम दूध में गर्म करके खाने से कफ की मात्रा घटती है, शरीर में नई शक्ति आती है और दमा (अस्थमा) रोग मिटता है।”
3 प्यास की अधिकता :- बार-बार प्यास लगने पर अंजीर का सेवन करें।
4 मुंह के छाले :– अंजीर का रस मुंह के छालों पर लगाने से आराम मिलता है।
5 प्रदर रोग :- अंजीर का रस 2 चम्मच शहद के साथ प्रतिदिन सेवन करने से दोनों प्रकार के प्रदर रोग नष्ट हो जाते हैं।
6 दांतों का दर्द :- *अंजीर का दूध रुई में भिगोकर दुखते दांत पर रखकर दबाएं। *अंजीर के पौधे से दूध निकालकर उस दूध में रुई भिगोकर सड़ने वाले दांतों के नीचे रखने से दांतों के कीड़े नष्ट होते हैं तथा दांतों का दर्द मिट जाता है।”
7 पेशाब का अधिक आना :– 3-4 अंजीर खाकर, 10 ग्राम काले तिल चबाने से यह कष्ट दूर होता है।
8 त्वचा के विभिन्न रोग :- *कच्चे अंजीर का दूध समस्त त्वचा सम्बंधी रोगों में लगाना लाभदायक होता है।
*अंजीर का दूध लगाने से दिनाय (खुजली युक्त फुंसी) और दाद मिट जाते हैं। बादाम और छुहारे के साथ अंजीर को खाने से दाद, दिनाय (खुजली युक्त फुंसी) और चमड़ी के सारे रोग ठीक हो जाते है।”
9 दुर्बलता (कमजोरी) :– *पके अंजीर को बराबर की मात्रा में सौंफ के साथ चबा-चबाकर सेवन करें। इसका सेवन 40 दिनों तक नियमित करने से शारीरिक दुर्बलता दूर हो जाती है।
*अंजीर को दूध में उबालकर-उबाला हुआ अंजीर खाकर वही दूध पीने से शक्ति में वृद्धि होती है तथा खून भी बढ़ता है।”
10 रक्तवृद्धि और शुद्धि हेतु :– 10 मुनक्के और 5 अंजीर 200 मिलीलीटर दूध में उबालकर खा लें। फिर ऊपर से उसी दूध का सेवन करें। इससे रक्तविकार दूर हो जाता है।
11 पेचिश और दस्त :– अंजीर का काढ़ा 3 बार पिलाएं।
12 ताकत को बढ़ाने वाला :– सूखे अंजीर के टुकड़े और छिली हुई बादाम गर्म पानी में उबालें। इसे सुखाकर इसमें दानेदार शक्कर, पिसी इलायची, केसर, चिरौंजी, पिस्ता और बादाम बराबर मात्रा में मिलाकर 8दिन तक गाय के घी में पड़ा रहने दें। बाद में रोजाना सुबह 20 ग्राम तक सेवन करें। छोटे बालकों की शक्तिक्षीण के लिए यह औषधि बड़ी हितकारी है।
13 जीभ की सूजन :– सूखे अंजीर का काढ़ा बनाकर उसका लेप करने से गले और जीभ की सूजन पर लाभ होता है।
14 पुल्टिश :– ताजे अंजीर कूटकर, फोड़े आदि पर बांधने से शीघ्र आराम होता है।
15 दस्त साफ लाने के लिए :– दो सूखे अंजीर सोने से पहले खाकर ऊपर से पानी पीना चाहिए। इससे सुबह साफ दस्त होता है।
16 क्षय यानी टी.बी के रोग :– इस रोग में अंजीर खाना चाहिए। अंजीर से शरीर में खून बढ़ता है। अंजीर की जड़ और डालियों की छाल का उपयोग औषधि के रूप में होता है। खाने के लिए 2 से 4 अंजीर का प्रयोग कर सकते हैं।
17 फोड़े-फुंसी :– अंजीर की पुल्टिस बनाकर फोड़ों पर बांधने से यह फोड़ों को पकाती है।
18 गिल्टी :– अंजीर को चटनी की तरह पीसकर गर्म करके पुल्टिस बनाएं। 2-2 घंटे के अन्तराल से इस प्रकार नई पुल्टिश बनाकर बांधने से `बद´ की वेदना भी शांत होती है एवं गिल्टी जल्दी पक जाती है।
19 सफेद कुष्ठ (सफेद दाग) :– *अंजीर के पेड़ की छाल को पानी के साथ पीस लें, फिर उसमें 4 गुना घी डालकर गर्म करें। इसे हरताल की भस्म के साथ सेवन करने से श्वेत कुष्ठ मिटता है।
*अंजीर के कच्चे फलों से दूध निकालकर सफेद दागों पर लगातार 4 महीने तक लगाने से यह दाग मिट जाते हैं।
*अंजीर के पत्तों का रस श्वेत कुष्ठ (सफेद दाग) पर सुबह और शाम को लगाने से लाभ होता है।
*अंजीर को घिसकर नींबू के रस में मिलाकर सफेद दाग पर लगाने से लाभ होता है।”
20 गले के भीतर की सूजन :– सूखे अंजीर को पानी में उबालकर लेप करने से गले के भीतर की सूजन मिटती है।
21 श्वासरोग :– अंजीर और गोरख इमली (जंगल जलेबी) 5-5 ग्राम एकत्रकर प्रतिदिन सुबह को सेवन करने से हृदयावरोध (दिल की धड़कन का अवरोध) तथा श्वासरोग का कष्ट दूर होता है।
22 शरीर की गर्मी :– पका हुआ अंजीर लेकर, छीलकर उसके आमने-सामने दो चीरे लगाएं। इन चीरों में शक्कर भरकर रात को ओस में रख दें। इस प्रकार के अंजीर को 15 दिनों तक रोज सुबह खाने से शरीर की गर्मी निकल जाती है और रक्तवृद्धि होती है।
23 जुकाम :– पानी में 5 अंजीर को डालकर उबाल लें और इसे छानकर इस पानी को गर्म-गर्म सुबह और शाम को पीने से जुकाम में लाभ होता है।
24 फेफड़ों के रोग :– फेफड़ों के रोगों में पांच अंजीर एक गिलास पानी में उबालकर छानकर सुबह-शाम पीना चाहिए।
25 मसूढ़ों से खून का आना :– अंजीर को पानी में उबालकर इस पानी से रोजाना दो बार कुल्ला करें। इससे मसूढ़ों से आने वाला खून बंद हो जाता है तथा मुंह से दुर्गन्ध आना बंद हो जाती है।
26 तिल्ली (प्लीहा) के रोग में :– अंजीर 20 ग्राम को सिरके में डुबोकर सुबह और शाम रोजाना खाने से तिल्ली ठीक हो जाती है।
27 खांसी :– *अंजीर का सेवन करने से सूखी खांसी दूर हो जाती है। अंजीर पुरानी खांसी वाले रोगी को लाभ पहुंचाता है क्योंकि यह बलगम को पतला करके बाहर निकालता रहता है।
*2अंजीर के फलों को पुदीने के साथ खाने से सीने पर जमा हुआ कफ धीरे-धीरे निकल जाएगा।
*पके अंजीर का काढ़ा पीने से खांसी दूर हो जाती है।”
28 गुदा चिरना :– सूखा अंजीर 350 ग्राम, पीपल का फल 170 ग्राम, निशोथ 87.5 ग्राम, सौंफ 87.5 ग्राम, कुटकी 87.5 ग्राम और पुनर्नवा 87.5 ग्राम। इन सब को मिलाकर कूट लें और कूटे हुए मिश्रण के कुल वजन का 3 गुने पानी के साथ उबालें। एक चौथाई पानी बच जाने पर इसमें 720 ग्राम चीनी डालकर शर्बत बना लें। यह शर्बत 1 से 2 चम्मच प्रतिदिन सुबह-शाम पीयें।
29 बवासीर (अर्श) :- *सूखे अंजीर के 3-4 दाने को शाम के समय जल में डालकर रख दें। सुबह उन अंजीरों को मसलकर प्रतिदिन सुबह खाली पेट खाने से अर्श (बवासीर) रोग दूर होता है।
*अंजीर को गुलकन्द के साथ रोज सुबह खाली पेट खाने से शौच के समय पैखाना (मल) आसानी से होता है।”
30 कमर दर्द :– अंजीर की छाल, सोंठ, धनियां सब बराबर लें और कूटकर रात को पानी में भिगो दें। सुबह इसके बचे रस को छानकर पिला दें। इससे कमर दर्द में लाभ होता है।
31 आंवयुक्त पेचिश :- पेचिश तथा आवंयुक्त दस्तों में अंजीर का काढ़ा बनाकर पीने से रोगी को लाभ होता है।
32 अग्निमान्द्य (अपच) होने पर :– अंजीर को सिरके में भिगोकर खाने से भूख न लगना और अफारा दूर हो जाता है।
33 प्रसव के समय की पीड़ा :– प्रसव के समय में 15-20 दिन तक रोज दो अंजीर दूध के साथ खाने से लाभ होता है।
34 बच्चों का यकृत (जिगर) बढ़ना :– 4-5 अंजीर, गन्ने के रस के सिरके में गलने के लिए डाल दें। 4-5 दिन बाद उनको निकालकर 1 अंजीर सुबह-शाम बच्चे को देने से यकृत रोग की बीमारी से आराम मिलता है।
35 फोड़ा (सिर का फोड़ा) :– फोड़ों और उसकी गांठों पर सूखे अंजीर या हरे अंजीर को पीसकर पानी में औटाकर गुनगुना करके लगाने से फोड़ों की सूजन और फोड़े ठीक हो जाते हैं।
36 दाद :– अंजीर का दूध लगाने से दाद ठीक हो जाता है।
37 सिर का दर्द :– सिरके या पानी में अंजीर के पेड़ की छाल की भस्म मिलाकर सिर पर लेप करने से सिर का दर्द ठीक हो जाता है।
38 सर्दी (जाड़ा) अधिक लगना :- लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग की मात्रा में अंजीर को खिलाने से सर्दी या शीत के कारण होने वाले हृदय और दिमाग के रोगों में बहुत ज्यादा फायदा मिलता है।
39 खून और वीर्यवद्धक :- *सूखे अंजीर के टुकड़ों एवं बादाम के गर्भ को गर्म पानी में भिगोकर रख दें फिर ऊपर से छिलके निकालकर सुखा दें। उसमें मिश्री, इलायची के दानों की बुकनी, केसर, चिरौंजी, पिस्ते और बलदाने कूटकर डालें और गाय के घी में 8 दिन तक भिगोकर रखें। यह मिश्रण प्रतिदिन लगभग 20 ग्राम की मात्रा में खाने से कमजोर शक्ति वालों के खून और वीर्य में वृद्धि होती है।
*एक सूखा अंजीर और 5-10 बादाम को दूध में डालकर उबालें। इसमें थोड़ी चीनी डालकर प्रतिदिन सुबह पीने से खून साफ होता है, गर्मी शांत होती है, पेट साफ होता है, कब्ज मिटती है और शरीर बलवान बनता है।
*अंजीर को अधिक मात्रा में सेवन करने से शरीर शक्तिशाली होता है, और मनुष्य के संभोग करने की क्षमता भी बढ़ती है।
अंजीर अपने खट्टे-मीठे स्वाद के लिए प्रसिद्ध अंजीर एक स्वादिष्ट, स्वास्थ्यवर्धक और बहु उपयोगी फल है।अंजीर कई प्रकार का होता है जिसमें से कुछ इस प्रकार के हैं।वैज्ञानिकों के अनुसार अंजीर कि इसके सूखे फल में कार्बोहाइड्रेट (शर्करा) 63 प्रतिशत, प्रोटीन 5.5 प्रतिशत, सेल्यूलोज 7.3 प्रतिशत, चिकनाई एक प्रतिशत, खनिज लवण 3 प्रतिशत, अम्ल 1.2 प्रतिशत, राख 2.3 प्रतिशत और जल 20.8 प्रतिशत होता है। इसके अलावा प्रति 100 ग्राम अंजीर में लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग लोहा, विटामिन,थोड़ी मात्रा में चूना, पोटैशियम, सोडियम, गंधक, फास्फोरिक एसिड और गोंद भी पाया जाता है।

Tuesday, June 7, 2016

आयुर्वेद

दांतों की बीमारी का उपचार :
-10 सेंधा नमक बारीक पीसकर कपड़-छान
कर लें। उसमें से दो ग्राम नमक हथेली पर रखकर चार
गुना सरसों का तेल डालकर मिश्रण तैयार करें। बाद में नमक तेल के
मिश्रण से अंगुली द्वारा दांत एवं
मसूड़ों की रोजाना सुबह हल्की मालिश करें
तथा बाद में सादे या गुनगुने पानी से कुल्ला कर लें। इससे
दांतों का ठंडा, गर्म और खट्टा लगना समाप्त हो जाता है।
-आंवला जलाकर सरसों के तेल में मिलाएं
इसे मसूड़ों पर धीरे-धीरे मलें
- नीम की पत्तियां, काली मिर्च
और काला नमक मिलाकर पीस लें
इसका नियमित सेवन करें
- खस, इलायची और लौंग का तेल मिलाकर मसूड़ों में लगाएं
- जीरा, सेंधा नमक, हरड़,
दालचीनी,
दक्षिणी सुपारी को समान मात्रा में लें
इसे बंद बर्तन में जलाकर पीस लें इस मंजन का नियमित
प्रयोग करें
- फिटकरी और काला नमक बारीक
पीसकर दांतों पर मलें।
-कीड़ा लगने से बचने का सबसे
सही तरीका है कि रात को ब्रश करके सोएं।
मीठी और स्टार्च
आदि की चीजें कम खाएं और बार - बार न
खाएं। मीठी चीजें खाने के बाद
कुल्ला करें या ब्रश करें।
दांतों की अच्छी तरह सफाई करें।
-नीम का दातुन करने से पहले उसे
अच्छी तरह चबाते रहें। जब दातुन
का अगला हिस्सा नरम हो जाए तो फिर उसमें दांत धीरे -
धीरे साफ करें।
- लहसुन बैक्टीरिया को मारने के लिए एक प्राकृतिक
हथियार है। कच्चे लहसुन का रस संक्रमण को मारने में मदद
करता है। यदि वास्तव में आपके दांत में बहुत अधिक दर्द
हो रहा हो तो आप ऐसा कर सकते हैं। कच्चे लहसुन
की एक कली लें। इसे पीसें और
निचोड़ें तथा इसका रस निकालें। इस रस को प्रभावित क्षेत्र पर लगायें।
यह घरेलू उपचार दांत के दर्द में जादू की तरह काम
करता है।
-एक टेबलस्पून नारियल का तेल लें और इसे अपने मुंह में चलायें।
इसे निगले नहीं, इसे लगभग 30 मिनिट तक अपने मुंह
में रखें रहें। फिर इसे थूक दें और मुंह धो लें। आपको निश्चित रूप से
आराम मिलेगा।
-दांत के दर्द में पेपरमिंट आईल जादू की तरह काम
करता है। अपनी उँगलियों के पोरों पर कुछ तेल लें तथा इसे
धीरे धीरे प्रभावित क्षेत्र पर मलें।
आपको दांत के दर्द से तुरंत आराम मिलेगा।
-. टी बैग टी बैग एक अन्य घरेलू उपचार
है। हर्बल टी बैग को प्रभावित क्षेत्र पर लगायें।
इससे पस के कारण होने वाले दर्द से आपको तुरंत आराम मिलेगा।
-ओरेगानो आईल में एंटी बैक्टीरियल,
एंटी फंगल, एंटी ऑक्सीडेंट
और एंटी वाइरल गुणधर्म होते हैं। यह घरेलू उपचार में
बहुत प्रभावकारी होता है विशेष रूप से दांतों और
मसूड़ों की बीमारियों में।
-दांतों में पस होने पर ऐप्पल सीडर विनेगर एक अन्य
प्रभावशाली उपचार है। चाहे वह प्राकृतिक
हो या ऑर्गेनिक, यह बहुत अधिक प्रभावशाली है।
एक टेबलस्पून ए सी वी लें। इसे कुछ समय
के लिए अपने मुंह में रखें और फिर इसे थूक दें। इसे निगलें
नहीं। इससे प्रभावित क्षेत्र रोगाणुओं से मुक्त
हो जाएगा। इससे सूजन भी कम होती

Sunday, June 5, 2016

आयुर्वेद से डैंड्रफ दूर करने के उपाय

डैंड्रफ की समस्या होने पर स्कॉल्प
की सफाई का ध्यान
रखना आवश्यक है। इसीलिए सप्ताह में दो-
तीन बार
अच्छा हर्बल शैंपू करना चाहिए और
बालों को अच्छी तरह से
मालिश करनी चाहिए।
शैम्पू की जगह ये करे:: आंवला, रीठा और
शिकाकाई
तीनो का एक एक चम्म्च एक मग गर्म
पानी में घोल ले और
एक घण्टे बाद इसे शैम्पू की जगह लगाए
• रोज रात को बालों की जड़ों में सरसों के तेल से मालिश
कीजिए। सुबह शिकाकाई पानी में उबाल कर
उस पानी से बाल
धो लें।
• ग्लीसरीन और गुलाब जल को रोज
बालों की जड़ों में लगाने से
ये समस्या दूर हो सकती है।
• डैंड्रफ से बचने के लिए जैतून के तेल में अदरक के रस
की कुछ बूंदे मिलाकर इसे बालों की जड़ों में
लगाकर एक घंटे के
लिए छोड़ दें और फिर शैंपू से धो दें।
• आँवला,शिकाकाई पावडर को दही में मिलाए। यह मिश्रण
बालों में लगाने से बालों की डीप
कंडीशनिंग होती है।
• बालों में तेल लगाने के बाद स्टीम्ड तौलिए का प्रयोग
करना भी अच्छा रहता है या फिर गर्म तेल से स्कॉल्प
की मसाज करने से सिर की त्वचा को पोषण
मिलता है।
• बालों को बार-बार कंघी मत कीजिए,
नहीं तो स्कॉल्प से
ज्यादा ऑयल निकलने से डेंड्रफ
की समस्या भी बढ़ जाती है।
• खाने-पीने का खासा ध्यान
रखना जरूरी होता है। ऐसे में खूब
पानी पीना चाहिए।
• दही को बालों में कम से कम आधे घंटे तक लगाने से
डैंड्रफ
को दूर किया जा सकता है।
• नीबू का रस और काली मिर्च पाउडर
मिलाकर
बालों की जड़ों में लगाना भी अच्छा रहता है।
• अधिक स्ट्रांग तेल बालों का झड़ना बढ़ा सकता है। ऐसे में
जड़ीबूटी युक्त नीम और काले
तिल का तेल मिलाकर अधिक
डैंड्रफ होने पर सप्ताह में कम से कम तीन बार
लगाएं।
• आयुर्वेदिक शैंपू डैंड्रफ दूर करने के लिए अच्छा विकल्प है।
• नारियल के तेल में कपूर मिलाकर लगाने से डैंड्रफ दूर
होता है।
• दही से सिर धोने पर भी डेंड्रफ से
छुटकारा पाया जा सकता है।
डेंड्रफ के कारण ::
• बालों की ठीक तरह से सफाई न करना,
बालों को सही पोषण
न मिलना या फिर बालों में तेल न लगाने से डेंड्रफ
हो सकती है।
• पेट साफ़ न होना या कब्ज भी डेंड्रफ़ का कारण
होता है
• अधिक तनाव या पसीने के कारण भी ये
समस्या पनप
सकती है।
• हालांकि डेंड्रफ का कोई पुख्ता कारण मौजूद नहीं है,
लेकिन
सीबम उत्पन्न करने वाली ग्रंथियों के
ज्यादा सक्रिय होने
की वजह से डेंड्रफ होता है।
• कम पानी पीने या फिर भोजन में पोषक
तत्वों की कमी के
कारण भी डेंड्रफ हो सकता है।
• युवावस्था में अधिक मात्रा में हॉर्मोंन्स रिलीज होने से
भी डैंड्रफ हो सकती है।
++++++
“जन-जागरण लाना है तो पोस्ट को Share करना है।”