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Friday, May 27, 2016

गले के दर्द में हल्दी का इस्तेमाल करे घरेलू इलाज़

अनगिनत औषधी के गुणों वाला हल्दी हर भारतीय घर में मसाले के रूप में पाई जाती है। इसमें विटामिन, मिनरल, डाइटरी फाइबर और प्रोटीन होता है, जो हल्दी को एंटी-इंफ्लेमेटॉरी (प्रज्वलनरोधी), एन्टी- ऑक्सीडेंट , कफ निस्सारक, एन्टी-फंगल(फंगसरोधी) , एन्टीसेप्टिक (रोगाणुरोधक), और कैंसर विरोधी घटक बनाता है-जिसके कारण यह गले के दर्द से राहत दिलाने में मदद करती है।
हल्दी कच्ची हो या पकी, दोनों ही रूपों में यह लाभदायक होती है। इसके अलावा हल्दी केजड़ों में भी कई तरह के एसेंशियल ऑइल होते हैं, जो उपचार करने में सक्षम होते हैं। हल्दी गले के दर्द में सूजन को कम करके जलन, खुजली, दर्द आदि से राहत दिलाने में मदद करती है
गरारा/कुल्ला: इस पद्धति से गले के सतह पर हल्दी का एक स्तर जम जाता है जो जीवाणु को मिटाने में मदद करता है। इन्हीं जीवाणुओं के कारण गले में दर्द होता है। नियमित रूप से गरारा करने पर गले का दर्द भी धीरे-धीरे ठीक होने लगता है। इस उपचार के लिए आधा कप गुनगुना गर्म पानी लें उसमें आधा चम्मच नमक और एक चौथाई चम्मच हल्दी पावडर डालें। इस मिश्रण से सुबह पहले गरारा करें। गरारा करने के बाद आधा घंटे तक कुछ खायें पीएं नहीं ताकि औषधी अच्छी तरह से काम कर सके।
हल्दी दूध: हल्दी का सबसे ज़्यादा इस्तेमाल सर्दी, खांसी और गले के दर्द के दवा के रूप में होता है। हल्दी के एंटी-इंफ्लेमेटॉरी (प्रज्वलनरोधी) गुण के साथ दूध के असंख्य स्वास्थ्यवर्द्धक गुण मिल जाते हैं, जो गले के दर्द से राहत दिलाने में बहुत मदद करते हैं। हल्दी दूध को बनाने के लिए एक गिलास दूध में आधा चम्मच हल्दी और पीसी हुई काली मिर्च डालें। गले के दर्द से राहत पाने के लिए दिन में दो बार इसका सेवन करें।
हल्दी चाय: शहद और नींबू का रस गुनगुने गर्म पानी में मिलाकर सेवन करने से बहुत जल्दी गले के दर्द स

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