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Saturday, May 28, 2016

मासिकधर्म

आमतौर पर मासिकधर्म आने का समय 28 दिन का होता है। परन्तु यह कभी-कभी 20 दिनों में ही हो जाता है और कभी-कभी 45 दिनों पर भी होता है। कभी-कभी मासिकधर्म की अनियमितता होने से प्रजनन क्षमता अर्थात गर्भधारण करने की क्षमता कम हो जाती है। इस मासिकधर्म के 2 महत्वपूर्ण परिणाम होते हैं-
हर महीने डिंबाशयों से सामान्यत: एक परिपक्व डिंब निकलता है जिससे एक वक्त में एक ही भ्रूण का विकास होता है।
महीने के वांच्छित समय पर निषेचित डिंब की स्थापना के लिए अंतगर्भाशय कला को तैयार करना।
मासिकस्राव से गर्भाशय के स्वास्थ्य का पता चलता है तथा इससे ही डिंबाशयों व पिट्युटरी ग्रंथि को नियंत्रण करने वाली इण्डोक्राइन ग्रंथियों के स्वास्थ्य का भी पता चलता है। स्त्री की प्रजनन प्रणाली की विसंगतियां अधिक मासिकस्राव की विसंगतियों में भी शामिल रहती है। ऐसी ही कुछ विसंगतियां हैं।
मासिकस्राव का बन्द होना-
यदि कोई स्त्री कभी रजस्वलित (मासिकधर्म न आया हो) नहीं हुई हो तो ऐसी स्थिति को प्राथमिक अनार्तव कहते हैं। यह इंडोक्राइन की विसंगतियां अधिकतर पिट्युटरी ग्रंथि या अध-श्चेतक (हाईपोथैलेमस) की विसंगतियों या अनुवांशिक कारणों से डिबांशयों या गर्भाशय के असामान्य विकास के कारण होती है।
दूसरे प्रकार के अनार्तव (मासिकधर्म न आना) में किसी भी स्त्री के जीवन में कभी-कभी एक या दो मासिकधर्म सामान्य नहीं होते हैं। स्त्रियों में मासिकधर्म की ऐसी गड़बड़ी शारीरिक वजन के कम या अधिक होने के कारण मानी जाती है। मोटापा डिंबाशयों की प्रणाली को अव्यवस्थित कर सकता है और इस प्रकार भूख न लगने पर शारीरिक वजन में अधिक कमी के कारण मासिकस्राव रुक जाता है। परन्तु जब मासिकधर्म का संबंध शारीरिक वजन से नहीं होता, तब पिट्युटरी और डिंबाशयों के हार्मोन्स की कमी होना इसका कारण होता है।

तार्किक लगा संदेश

यदि रंग गोरा करने वाली क्रीम होती तो बाजार क्षेत्र भारत नहीँ अफ्रीका होता और ओबामा और ओपेरा विनफ्रे जैसे अरबपति काले नहीँ होते।
* यदि कद लंबा करने वाली दवा सच मेँ कद बढ़ाती तो नेपाल और चाईना की खपत ही पूरी नहीँ हो पाती।
* यदि बाल काले, मुलायम, रेशमी करने वाला तेल होता तो अमेरिका और यूरोप मेँ चमकीले सुनहरे टाईप बाल नहीँ होते।
क्या आप भी जरूरत की चीजें खरीदते हैं या विज्ञापन देखकर जरूरत महसूस करते है।

Friday, May 27, 2016

मेथी दाना अजवाइन काली जीरी

मेथी दाना -२५० ग्राम ,अजवाइन-१०० ग्राम ,काली जीरी-५०
ग्राम ।
उपरोक्त तीनो चीज़ों को साफ़ करके हल्का सा सेंक लें ,फिर
तीनों को मिलाकर मिक्सर मेंइसका पॉवडरबना लें और कांच
की किसी शीशी में भर कर रख लें । रात को सोते समय
१/२चम्मच पॉवडरएक गिलास कुनकुने पानी के साथ नित्य लें
,इसके बाद कुछ भी खाना यापीना नहीं है ।इसे सभी उम्र के
लोग लेसकते हैं । फायदा पूर्ण रूप से ८०-९० दिन में हो जायेगा ।
लाभ :-इस चूर्ण को नित्य लेने से शरीर के कोने -कोने में जमा
पड़ी सभी गंदगी (कचरा )मल और पेशाब द्वारा निकलजाता है
,फ़ालतू चर्बी गल जाती है ,चमड़ी की झुर्रियां अपने आप दूर हो
जाती है ,और शरीर तेजस्वी और फुर्तीला होजाता है ।अन्य
लाभ इस प्रकार हैं ----------
१. गठिया जैसा ज़िद्दी रोग दूर हो जाताहै ।
२. शरीर की रोग प्रतिकारक शक्ति को बढ़ाता है ।
३. पुरानी कब्ज़ से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाती है ।
४. रक्त -संचार शरीर में ठीक से होने लगता है ,शरीर की रक्त -
नलिकाएं शुद्ध हो जाती हैं ,रक्त में सफाई और शुद्धता की
वृद्धि होती है ।
५. ह्रदय की कार्य क्षमता में वृद्धिहोती है ,कोलेस्ट्रोलकम
होता है ,जिस से हार्ट अटैक का खतरा नहीं रहता |
६. हड्डियां मजबूत होती हैं ,कार्य करने की शक्तिबढ़ती हैं
,स्मरण शक्ति में भी वृद्धि होतीहै ।थकान नहीं होती है ।
७. आँखों का तेज़ बढ़ता है ,बहरापन दूर होता है ,बालों का भी
विकास होता है,दांत मजबूत होते हैं ।
८. भूतकाल में सेवन की गयी एलोपैथिकदवाओं के साइड -इफेक्ट्स
से मुक्ति मिलतीहै ।
९. खाना भारी मात्रा में या ज्यादाखाने के बाद भी पच
जाता है (इसका मतलब येनहीं है कि आप जानबूझ कर ज्यादा
खा ले) ।
१०. स्त्रियों का शरीर शादी के बादबेडौल नहीं होता ,शेप में
रहता है ,,शादी के बाद होने वालीतकलीफें दूर होती हैं ।
११. चमड़ी के रंग में निखार आता है ,चमड़ी सूख जाना ,झुर्रियां
पड़ना आदि चमड़ी के रोगों से शरीर मुक्त रहता है ।
१२. शरीर पानी ,हवा ,धूपऔर तापमान द्वारा होने वाले रोगों
से मुक्त रहता है ।
१३. डाइबिटीज़ काबू में रहती है ,चाहें तोइसकी दवा ज़ारी रख
सकते हैं।
१४. कफ से मुक्ति मिलती है ,नपुंसकता दूर होती है,,व्यक्ति का
तेज़ इस से बढ़ता है ,जल्दी बुढ़ापा नहीं आता ,। उम्र बढ़ जाती है
|
१५. कोई भी व्यक्ति ,किसी भी उम्र का हो ,इस चूर्ण का सेवन
कर सकता है ,मात्रा का ध्यान रखें

पानी नित्य सेवन करें

1 .पसीने में पानी पीना, छाया में बैठकर अधिक हवा खाना, छाती व सिर में दर्द पैदा करते हैं।
2 .भोजन के दौरान थोड़ा-थोड़ा पानी पीना, भोजन के बाद ज्यादा पानी नहीं पीना चाहिए।
🍋3 .दिनभर बैठक का काम करने वाले व्यक्ति को प्रातः घूमना चाहिए।
🍋4 .जूठा पानी पीने से टीबी, खांसी व दमा आदि बीमारियां पैदा होती हैं।
5 .पेट में पानी हो तो दो गोले नारियल का पानी नित्य सेवन करें।
6 .महिलाओं को विशेषकर अंगूर सेवन ज्यादा करना चाहिए।
7 .दही में बेसन मिलाकर उबटन की तरह मलें, शरीर की बदबू रफूचक्कर हो जाएगी।
8 .सांस फूलने पर दही की कढ़ी में देसी घी डालकर कुछ दिन खाएं।
🍋🍋9 .लू से छुटकारा पाने के लिए मिश्री के शरबत में एक कागजी नीबू निचोड़कर पीएं।
10 .कांच या कंकर खाने में आने पर ईसबगोल भूसी गरम दूध के साथ तीन समय सेवन करें।
11 .घाव न पके, इसलिए गरम मलाई (जितनी गरम सहन कर सकें) बांधें।

गले के दर्द में हल्दी का इस्तेमाल करे घरेलू इलाज़

अनगिनत औषधी के गुणों वाला हल्दी हर भारतीय घर में मसाले के रूप में पाई जाती है। इसमें विटामिन, मिनरल, डाइटरी फाइबर और प्रोटीन होता है, जो हल्दी को एंटी-इंफ्लेमेटॉरी (प्रज्वलनरोधी), एन्टी- ऑक्सीडेंट , कफ निस्सारक, एन्टी-फंगल(फंगसरोधी) , एन्टीसेप्टिक (रोगाणुरोधक), और कैंसर विरोधी घटक बनाता है-जिसके कारण यह गले के दर्द से राहत दिलाने में मदद करती है।
हल्दी कच्ची हो या पकी, दोनों ही रूपों में यह लाभदायक होती है। इसके अलावा हल्दी केजड़ों में भी कई तरह के एसेंशियल ऑइल होते हैं, जो उपचार करने में सक्षम होते हैं। हल्दी गले के दर्द में सूजन को कम करके जलन, खुजली, दर्द आदि से राहत दिलाने में मदद करती है
गरारा/कुल्ला: इस पद्धति से गले के सतह पर हल्दी का एक स्तर जम जाता है जो जीवाणु को मिटाने में मदद करता है। इन्हीं जीवाणुओं के कारण गले में दर्द होता है। नियमित रूप से गरारा करने पर गले का दर्द भी धीरे-धीरे ठीक होने लगता है। इस उपचार के लिए आधा कप गुनगुना गर्म पानी लें उसमें आधा चम्मच नमक और एक चौथाई चम्मच हल्दी पावडर डालें। इस मिश्रण से सुबह पहले गरारा करें। गरारा करने के बाद आधा घंटे तक कुछ खायें पीएं नहीं ताकि औषधी अच्छी तरह से काम कर सके।
हल्दी दूध: हल्दी का सबसे ज़्यादा इस्तेमाल सर्दी, खांसी और गले के दर्द के दवा के रूप में होता है। हल्दी के एंटी-इंफ्लेमेटॉरी (प्रज्वलनरोधी) गुण के साथ दूध के असंख्य स्वास्थ्यवर्द्धक गुण मिल जाते हैं, जो गले के दर्द से राहत दिलाने में बहुत मदद करते हैं। हल्दी दूध को बनाने के लिए एक गिलास दूध में आधा चम्मच हल्दी और पीसी हुई काली मिर्च डालें। गले के दर्द से राहत पाने के लिए दिन में दो बार इसका सेवन करें।
हल्दी चाय: शहद और नींबू का रस गुनगुने गर्म पानी में मिलाकर सेवन करने से बहुत जल्दी गले के दर्द स

Sunday, May 22, 2016

जीवन जीने के टिप्स-1

गोमाता के दूध में, रुई भिगाओ आप
चूर्ण फिटकरी बांधिए, मिटे आंख का ताप
पानी में गुड डालिए, बित जाए जब रात
सुबह छानकर पीजिए, अच्छे हों हालात
धनिया की पत्ती मसल,बूंद नैन में डार
दुखती अँखियां ठीक हों,पल लागे दो-चार ।
ऊर्जा मिलती है बहुत,पिएं गुनगुना नीर
कब्ज खतम हो, पेट की मिट जाए हर पीर
सुबह-सुबह पानी पिएं, घूंट-घूंट कर आप
बस दो-तीन गिलास है, हर औषधि का बाप ।
ठंडा पानी पियो मत, करता क्रूर प्रहार
करे हाजमे का सदा, ये तो बंटाढार
सूर्य किरण, नेचुरल हवा, भोजन से स्पर्श
हेल्थ बनावें आपका, पग-पग देवें हर्ष
भोजन करें जमीन पर, अल्थी पल्थी मार
चबा-चबा कर खाइए, वैद्य न झांकें द्वार
सुबह-सुबह फल जूस लो, दुपहर लस्सी-छांस
सदा रात में दूध पी, सभी रोग का नाश
दही उडद की दाल सँग, प्याज दूध के संग
जो खाएं इक साथ में, जीवन हो बदरंग
सुबह-दोपहर लीजिये, जब नियमित आहार
तीस मिनट की नींद लो, रोग न आवें द्वार
भोजन करके रात में, घूमें कदम हजार
डाक्टर, ओझा, वैद्य की, लुट जाए बाजार
देश, भेष, मौसम यथा, हो जैसा परिवेश
वैसा भोजन कीजिये, कहते सखा सुरेश
इन बातों को मान कर, जो करता उत्कर्ष
जीवन में पग-पग मिले, उस प्राणी को हर्षl
जीवन जीने के टिप्स--2
*******************
घूट-घूट पानी पियो, रह तनाव से दूर
एसिडिटी, या मोटापा, होवें चकनाचूर ।
अर्थराइज या हार्निया, अपेंडिक्स का त्रास
पानी पीजै बैठकर, कभी न आवें पास ।
रक्तचाप बढने लगे, तब मत सोचो भाय
कसम राम की खाइ के, तुरत छोड दो चाय
सुबह खाइये कुवंर-सा, दुपहर यथा नरेश
भोजन लीजै रात में, जैसे रंक सुरेश
देर रात तक जागना, रोगों का जंजाल
अपच, आंख के रोग सँग, तन भी रहे निढाल
टूथपेस्ट-ब्रश छोडकर, हर दिन दोनो जून
दांत करें मजबूत यदि, करिएगा दातून
हल्दी तुरत लगाइए, अगर काट ले श्वान
खतम करे ये जहर को, कह गै कवि सुजान
मिश्री, गुड, शहद, ये हैं गुण की खान
पर सफेद शक्कर सखा, समझो जहर समान
चुंबक का उपयोग कर, ये है दवा सटीक
हड्डी टूटी हो अगर, अल्प समय में ठीक ।
दर्द, घाव, फोडा, चुभन, सूजन, चोट पिराइ
बीस मिनट चुंबक धरौ, पिरवा जाइ हेराइ
हँसना, रोना, छींकना, भूख, प्यास या प्यार
क्रोध, जम्हाई रोकना, समझो बंटाढार
सत्तर रोगों कोे करे, चूना हमसे दूर
दूर करे ये बाझपन, सुस्ती अपच हुजूर
यदि सरसों के तेल में, पग नाखून डुबाय
खुजली, लाली, जलन सब, नैनों से गुमि जाय
आलू का रस अरु शहद, हल्दी पीस लगाव
अल्प समय में ठीक हों, जलन, फँफोले, घाव
भोजन करके जोहिए, केवल घंटा डेढ
पानी इसके बाद पी, ये औषधि का पेड
जो भोजन के साथ ही ,पीता रहता नीर
रोग एक सौ तीन हों, फुट जाए तकदीर
पानी करके गुनगुना, मेथी देव भिगाय
सुबह चबाकर नीर पी, रक्तचाप सुधराय
मूंगफली, तिल, नारियल, घी सरसों का तेल
यही खाइए नहीं तो, हार्ट समझिए फेल
नम्बर वन सेंधा नमक, काला नमक सु जान
श्वेत नमक है सागरी, ये है जहर समान
मैदे से बिस्कुट बने, रोके हर उत्कर्ष
इसे न खावें रोक जो, हुए न चौदह वर्ष ।।
जीवन जीने के टिप्स-3
**************************
तेल वनस्पति खाइके, चर्बी लियो बढाइ
घेरा कोलस्टाल तो, आज रहे चिल्लाइ
जो जस्ता के पात्र का, करता है उपयोग
आमंत्रित करता सदा ,वह अडतालीस रोग ।
फल या मीठा खाइके, तुरत न पीजै नीर
ये सब छोटी आंत में, बनते विषधर तीर
चोकर खाने से सदा, बढती तन की शक्ति
गेहूँ मोटा पीसिए, दिल में बढे विरक्ति
नींबू पानी का सदा, करता जो उपयोग
पास नहीं आते कभी, यकृति-आंत के रोग
दूषित पानी जो पिए, बिगडे उसका पेट
ऐसे जल को समझिए, सौ रोगों का गेट
रोज मुलहठी चूसिए, कफ बाहर आ जाय
बने सुरीला कंठ भी, सबको लगत सुहाय
भोजन करके खाइए, सौंफ, और गुड, पान
पत्थर भी पच जायगा, जानै सकल जहान
लौकी का रस पीजिए, चोकर युक्त पिसान
तुलसी, गुड, सेंधा नमक, हृदय रोग निदान
हृदय रोग, खांसी और आंव करें बदनाम
दो अनार खाएं सदा, बनते बिगडे काम
चैत्र माह में नीम की, पत्ती हर दिन खाव
ज्वर, डेंगू या मलेरिया, बारह मील भगाव
सौ वर्षों तक वह जिए, लेत नाक से सांस
अल्पकाल जीवें, करें, मुंह से श्वासोच्छ्वास
मूली खाओ हर दिवस, करे रोग का नाश
गैस और पाईल्स का, मिट जाए संत्रास ।
जब भी लघु शंका करें, खडे रहे यदि यार
इससे हड्डी रीढ की, होती है बेकार
सितम, गर्म जल से कभी, करिये मत स्नान
घट जाता है आत्मबल, नैनन को नुकसान
हृदय रोग से आपको, बचना है श्रीमान
सुरा, चाय या कोल्ड्रिंक, का मत करिए पान
अगर नहावें गरम जल, तन-मन हो कमजोर
नयन ज्योति कमजोर हो, शक्ति घटे चहुंओर
तुलसी का पत्ता करें, यदि हरदम उपयोग
मिट जाते हर उम्र में, तन के सारे रोग
मछली के संग दूध या, दूध-चाय, नमकीन
चर्म रोग के साथ में, रोग बुलाते तीन
बर्गर, गुटखा, सुरा अरु कोक, सुअर का मांस
जो हरदम सेवन करे, बने गले का फाँस
ध्यान रखें ये बात तो, मिट जाएं हर क्लेश
डाक्टर, ओझा, वैद्य से, रखते दूर.